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क्या है STT? जिसपर टैक्स बढ़ाने के बाद आई सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

STT एक तरह का टैक्स है, जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की खरीद-बिक्री पर लगाया जाता है.

FM Nirmala Sitharaman announces hike in STT FM Nirmala Sitharaman announces hike in STT
हाइलाइट्स
  • सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

  • आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

बजट 2026 में एफ एंड ओ (F&O) ट्रेडिंग पर Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाने के फैसले के बाद शेयर बाजार में हाहाकार मच गया है. वित्त मंत्री ने इस बार STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया. पिछली बजट में भी STT में बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन इस बार का ऐलान सीधे कैपिटल मार्केट को झटका देने वाला साबित हो रहा है.

क्या है STT ?
एक तरह का टैक्स है, जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की खरीद-बिक्री पर लगाया जाता है. खास बात यह है कि यह टैक्स ट्रांजैक्शन होते ही कट जाता है, चाहे निवेशक को मुनाफा हो या नुकसान.

आसान भाषा में समझें तो जब भी आप शेयर या डेरिवेटिव खरीदते या बेचते हैं, तो हर बार एक छोटा-सा चार्ज देना पड़ता है. इसे ही STT कहते हैं. यह रकम बेशक छोटी लग सकती है, लेकिन बार-बार ट्रेड करने वालों के लिए कुल लागत बढ़ा देती है.

इसमें प्रमुख दरें इस प्रकार हैं:

  • इक्विटी डिलीवरी (buy/sell) और इक्विटी ऑप्शन्स (sell): 0.1%

  • इंट्राडे (sell): 0.025%

  • फ्यूचर्स (sell): 0.02%

यह टैक्स हर लेन-देन की कीमत में जोड़ दिया जाता है.

कब शुरू हुआ STT?
भारत में STT 1 अक्टूबर 2004 को लागू किया गया था. इसका मकसद टैक्स चोरी रोकना, इक्विटी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग को पारदर्शी बनाना और टैक्स कलेक्शन को आसान करना था. बाद में बजट 2018 में लिस्टेड शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स फिर से लागू कर दिया गया, लेकिन STT जारी रहा.

शेयर बाजार पर असर
STT बढ़ने के फैसले के बाद निवेशक परेशान दिख रहे हैं. सेंसेक्स में 2000 अंकों की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 700 अंक टूटकर कारोबार कर रहा है. कैपिटल सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. बीएसई और ग्रो जैसे शेयरों में भारी बेचवाली देखने को मिली. वहीं, वेदांता, हिंदुस्तान जिंक और हिंदुस्तान कॉपर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

बाजार की वर्तमान स्थिति
निफ्टी 24,800 के नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि सेंसेक्स 80,500 के नीचे कारोबार कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि STT बढ़ने से F&O ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी, जिससे हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और छोटे इंवेस्टर्स पहले से सतर्क हो गए हैं.

आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?
STT बढ़ने से शेयर बाजार में ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी. यानी हर खरीदी और बिक्री पर ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा. इससे कुछ निवेशक शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से दूरी बना सकते हैं. हालांकि लॉन्ग टर्म निवेशकों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.