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Real Estate 2% Rule: क्या होता है रियल एस्टेट की दुनिया में क्या होता है 2 प्रतिशत वाला रूल, कैसे और कहां करता ये मदद?

ये रूल केवल उन प्रॉपर्टी पर लागू होता है, जिन्हें रेंट पर दिया जा रहा हो. 2% रूल का रेंटल प्रॉपर्टी के रेंट को तय करता है. 2% रूल में प्रॉपर्टी की कीमत और बेसिक रिपेयर की कीमत होती है. साथ ही आपको मुनाफा भी हो रहा है.

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रियल एस्टेट से जुड़े कई शब्द और नियम ऐसे होते हैं, जो खासकर नॉन–रियल एस्टेट बैकग्राउंड वाले लोगों को कन्फ्यूज कर देते हैं. किराए पर प्रॉपर्टी लेने या निवेश करने की सोच रहे लोगों के लिए ऐसे नियम समझना और भी मुश्किल हो जाता है. इन्हीं में से एक है 2% रूल, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, जबकि यह रेंटल प्रॉपर्टी की शुरुआती जांच में काफी मददगार माना जाता है.

आसान भाषा में समझें तो 2% रूल कहता है कि कोई भी रेंटल प्रॉपर्टी तब फाइनेंशियली बेहतर मानी जाती है, जब उसका मासिक किराया प्रॉपर्टी की कुल खरीद कीमत का कम से कम 2% हो. इस कुल कीमत में प्रॉपर्टी की खरीद के साथ-साथ बेसिक रिपेयर और शुरुआती खर्च भी शामिल होते हैं. यह नियम निवेश से पहले एक मोटा अंदाजा लगाने में मदद करता है.

उदाहरण से समझिए 2% रूल
मान लीजिए आपने 60 लाख रुपए में एक प्रॉपर्टी खरीदी है. 2% रूल के हिसाब से इस प्रॉपर्टी का मासिक किराया करीब 1,20,000 रुपए होना चाहिए. अगर  किराया इससे कम है, तो माना जाता है कि उस प्रॉपर्टी से अच्छा कैश फ्लो मिलना मुश्किल हो सकता है. यह जरूरी नहीं कि यह नियम मुनाफे की गारंटी देता है, बल्कि सिर्फ एक शुरुआती फिल्टर की तरह काम करता है.

2% रूल की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है. लोन की ब्याज दर, मेंटेनेंस खर्च, टैक्स और अन्य कई फैक्टर्स को गहराई से जोड़ने से पहले यह नियम निवेशकों को यह तय करने में मदद करता है कि कौन-सी प्रॉपर्टी आगे एनालिसिस के लायक है और कौन-सी नहीं. 

कैसे काम करता है 2% रूल?
अगर प्रॉपर्टी की कुल खरीद लागत (रिपेयर समेत) 60 लाख रुपए है और अनुमानित मासिक किराया 1,20,000 रुपए है, तो यह प्रॉपर्टी 2% रूल को पूरा करती है. इसका मतलब यह हुआ कि किराए से मिलने वाली आमदनी से EMI, मेंटेनेंस और टैक्स जैसे खर्च निकलने के बाद भी मुनाफे की गुंजाइश बन सकती है. वहीं अगर किराया सिर्फ 60,000 रुपए (यानी 1%) है, तो प्रॉपर्टी जरूरत से ज्यादा महंगी साबित हो सकती है.

क्या आज के समय में 2% रूल व्यवहारिक है?
इसका सीधा जवाब पूरी तरह 'नहीं' है. आज के दौर में, खासकर मेट्रो शहरों में, 2% रूल को पूरा करना लगभग नामुमकिन है. इसकी वजह है प्रॉपर्टी के आसमान छूते दाम और किराए में सीमित बढ़ोतरी. ज्यादातर मामलों में रेंटल सालाना 2–4% के आसपास ही रहती है, न कि मासिक. यही कारण है कि यह नियम छोटे शहरों या उभरते बाजारों में ज्यादा लागू होता है. फिर भी, यह कहना गलत होगा कि 2% रूल पूरी तरह बेकार हो चुका है. यह आज भी शुरुआती जांच के लिए एक उपयोगी गाइडलाइन बना हुआ है.