Namo Drone Didi Scheme (Photo/PTI)
Namo Drone Didi Scheme (Photo/PTI)
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को सब्सिडी वाले कृषि ड्रोन और ट्रेनिंग मिल रही है. जिसमें प्रशिक्षित ड्रोन दीदियों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे स्थान पर है.
खेत में खाद और कीटनाशक का छिड़काव पारंपरिक रूप से धीमा और मेहनत-भरा काम रहा है. केंद्रीय क्षेत्र की योजना के तौर पर शुरू की गई नमो ड्रोन दीदी योजना, इसका एक आधुनिक विकल्प - कृषि ड्रोन - सीधे ग्रामीण महिलाओं के हाथों में पहुंचा रही है, उनके स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए.
कैसे काम करती है यह योजना?
उत्तर प्रदेश की प्रगति-
जनवरी 2026 तक, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री के संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर महिला-नेतृत्व वाले SHGs को 1,094 ड्रोन वितरित किए जा चुके थे. सभी राज्यों में उत्तर प्रदेश 128 ड्रोन दीदियों के साथ दूसरे स्थान पर रहा - सिर्फ कर्नाटक (145) से पीछे, और आंध्र प्रदेश (108) व हरियाणा (102) से आगे.
राज्य के लिए एक उल्लेखनीय पड़ाव-
ड्रोन निर्माता कंपनी Marut Drones ने इस योजना के रोलआउट के तहत प्रयागराज जिले के फूलपुर से 90 महिलाओं को प्रशिक्षित किया. अब तक रिपोर्ट किए गए बड़े एकल-जिला प्रशिक्षण समूहों में से एक.
महिलाओं की आय के लिए इसका क्या मतलब है?
एक ड्रोन टीम आमतौर पर एक ही दिन में 20 एकड़ तक छिड़काव कर सकती है. इसके लिए पैकेज में मिले कई अतिरिक्त बैटरी सेट मददगार होते हैं. स्थानीय किसानों को किराए पर सेवा देने से मिलने वाली सीधी आय के अलावा, इस योजना का मकसद महिलाओं को मान्यता प्राप्त तकनीकी कौशल से लैस करना भी है. इसके तहत उन्हें DGCA-अनुमोदित ड्रोन पायलट लाइसेंस दिलाया जाता है, ताकि वे अपनी मौजूदा कृषि और घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ ड्रोन संचालन का हुनर भी हासिल कर सकें.
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