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दुनिया के वो देश जो खुद के करेंसी नोट नहीं छापते, आखिर क्या है इसके पीछे की वजह... किस जगह छपते हैं फिर इन देश के नोट?

करेंसी नोट को छापने में खास मशीनों, सुरक्षित कागज, खास स्याही और आधुनिक तकनीक की जरूरत होती है. कई देश इस पूरे सिस्टम को चलाने में सक्षम नहीं होते हैं. ऐसे में वह दूसरे देश में अपने नोट छपवाते हैं, फिर अफने देश में इस्तेमाल करते हैं.

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किसी भी देश की इकॉनोमी में नोटों की अहम भूमिका होती है. लोग रोजाना खरीदारी करने, बिल भरने और बैंक से पैसे निकालने के लिए करेंसी का इस्तेमाल करते हैं. आमतौर पर हम सोचते हैं कि हर देश अपने नोट खुद छापता होगा. लेकिन ऐसा नहीं है. 

दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जो अपने नोट छापने के लिए दूसरे देशों की मदद लेते हैं. नेपाल, बांग्लादेश और कई अन्य देश विदेशी कंपनियों से नोट छपवाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि ये देश ऐसा क्यों करते हैं?

कई देश विदेश में क्यों छपवाते हैं नोट?

नोट छापना कोई आसान काम नहीं है. इसके लिए खास मशीनों, सुरक्षित कागज, खास स्याही और आधुनिक तकनीक की जरूरत होती है. नोटों पर ऐसे सुरक्षा निशान भी बनाए जाते हैं, जिनकी नकल करना मुश्किल होता है. इन सभी सुविधाओं को तैयार करने और चलाने में काफी पैसा खर्च होता है.

छोटे देशों के लिए अपनी सुरक्षित छपाई की फैक्ट्री बनाना महंगा पड़ सकता है. इसलिए वे दूसरे देशों की कंपनियों को नोट छापने का ठेका देते हैं. इससे उन्हें नई मशीनों और तकनीक पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ता.

नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका कहां छपवाते हैं नोट?

नेपाल लंबे समय तक अपने नोटों की छपाई के लिए भारत पर निर्भर रहा. बाद में उसने चीन से नोट छपवाने शुरू किए. चीन के पास आधुनिक मशीनें और नोट छापने की बड़ी क्षमता है. कम लागत और बेहतर तकनीक भी कई देशों को उसकी ओर आकर्षित करती है.

बांग्लादेश और कुछ अन्य एशियाई देश भी विदेशी कंपनियों से नोट छपवाने की सुविधा लेते हैं. हर देश के नोट किस कंपनी में छपते हैं, यह समय और सरकारी ठेकों के अनुसार बदल सकता है.

क्या भारत भी विदेश में छपवाता है अपने नोट?

भारत अपनी करेंसी की छपाई देश के अंदर करता है. इसके लिए विशेष सुरक्षा प्रेस और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की देखरेख में नोटों की व्यवस्था की जाती है. इससे देश को नोटों की छपाई और उनकी सुरक्षा पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलती है.

विदेश में नोट छपवाने के क्या हैं नुकसान?

विदेशी कंपनियों से नोट छपवाने के कुछ जोखिम भी हैं. नोटों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी बहुत गोपनीय होती है. अगर यह जानकारी गलत हाथों में पहुंच जाए, तो नकली नोट बनाने का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा, किसी राजनीतिक तनाव या सप्लाई में रुकावट के कारण नोटों की डिलीवरी में देरी हो सकती है.

इसलिए देश ठेका देने से पहले कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था, लागत और भरोसे की जांच करते हैं. नोट छपवाने के लिए तय संख्या और सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है.