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प्लास्टिक लाओ, शिक्षा पाओ: गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दे रही है यह पाठशाला

ज्ञान से बढ़कर जीवन मे कोई धन नहीं है. लेकिन ज्ञान सभी तक इतनी आसानी से नहीं पहुंच पाता है. और अगर शिक्षा आसानी मिल जाये तो हमें खुद को खुशकिस्मत समझना चाहिए. क्योंकि न जाने कितने ऐसे बच्चे हैं जिनको शिक्षा नहीं मिल पाती है. और नोएडा की ‘चैलेंजर्स की पाठशाला’ इसी काम को आसान बनाती है. चैलेंजर्स की पाठशाला एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए हर उम्र के गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है.

Challengers ki Pathshala Challengers ki Pathshala
हाइलाइट्स
  • चार सालों से चल रही है पाठशाला

  • मुफ्त शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण भी

ज्ञान से बढ़कर जीवन मे कोई धन नहीं है. लेकिन ज्ञान सभी तक इतनी आसानी से नहीं पहुंच पाता है. और अगर शिक्षा आसानी मिल जाये तो हमें खुद को खुशकिस्मत समझना चाहिए. क्योंकि न जाने कितने ऐसे बच्चे हैं जिनको शिक्षा नहीं मिल पाती है. 

और नोएडा की ‘चैलेंजर्स की पाठशाला’ इसी काम को आसान बनाती है. चैलेंजर्स की पाठशाला एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए हर उम्र के गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है. यहां बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है. पाठशाला के चार सेंटर नोएडा में मौजूद है जहां गरीब बच्चे आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं. 

चार सालों से चल रही है पाठशाला: 

चैलेंजर्स की पाठशाला को इसके संस्थापक प्रिंस शर्मा चलाते हैं. पिछले चार सालों से यह पाठशाला चलाई जा रही है. इसमें करीबन 350 गरीब घरों के बच्चे पढ़ते हैं. यहां बच्चों को दो भागों में बांटा गया है- एक छोटे बच्चो का एक समूह और एक बड़े बच्चों का.  

कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाई के साथ और भी कई तरह की नई चीजें सिखाई जाती है. इन्हीं में से एक है पाठशाला की नई मुहिम- ‘प्लास्टिक लाओ शिक्षा पाओ.’ इसमें बच्चे अपने घरों से प्लास्टिक इकट्ठा करके लाते हैं और उन्हें पाठशाला में प्लास्टिक की कलाकृतियां बनाना सिखाया जाता है. 

मुफ्त शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण भी: 

No Plastic
प्लास्टिक लाओ, शिक्षा पाओ

पाठशाला के संस्थापक प्रिंस शर्मा का कहना है कि इस मुहिम के जरिए बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा रहा है और साथ ही पर्यावरण संरक्षण हो रहा है. इस मुहिम के अंतर्गत महीने में एक दिन बच्चों के साथ मिलकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर प्लास्टिक इकट्ठा भी की जाती है. फिर पाठशाला में इससे कलाकृतियां बनाना बच्चों को सिखाया जाता है. 

कैसे हुई शुरुआत: 

पाठशाला को शुरू करने वाले प्रिंस बताते हैं कि एक बार रास्ते में उनसे एक गरीब बच्चे ने भीख मांगी. जिस पर प्रिंस ने बच्चे से कहा कि आप पढ़ते क्यों नहीं हो. लेकिन बच्चे ने इसके जवाब में कहा कि आप क्यों नहीं पढ़ाते.  उस बच्चे की बात ने प्रिंस को बहुत प्रभावित किया. 

और प्रिंस ने इस पाठशाला की शुरुआत की. पहले वह सड़कों पर बच्चों को जाकर पढ़ाते थे. फिर उन्होंने इस पाठशाला को खोला. और यहां पर आकर बच्चों ने पढ़ना शुरू किया. धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई है और अब यहां पर 350 से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. 

इन बच्चों की सराहना फिल्म स्टार सोनू सूद ने भी की है. पाठशाला के कुछ बच्चों का एडमिशन बड़ी क्लासेस में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी हुआ है. प्रिंस शर्मा बताते हैं कि उनका उद्देश्य इन गरीब बच्चों को इतना सक्षम बनाना है कि जब आगे चलकर बच्चे दूसरे स्कूलों में एडमिशन ले तो वह वहां पर बराबरी महसूस कर सकें.