Magical Notebook
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दिल्ली के एक सरकारी स्कूल की चार छात्राओं ने पढ़ाई को आसान बनाने के साथ-साथ कागज की खपत कम करने के लिए एक खास तरह की मैजिकल कॉपी तैयार की है. इस कॉपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पन्नों पर बार-बार लिखा और मिटाया जा सकता है. यानी एक ही कॉपी का लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. इतना ही नहीं, इसमें क्लास में पढ़ाए गए सबक को दोबारा सुनने के लिए रिकॉर्डर और NCERT की किताबें पढ़ने के लिए QR कोड भी दिया गया है.
कॉपी के पन्नों पर लिखिए, मिटाइए और फिर से इस्तेमाल कीजिए
आमतौर पर कॉपी के किसी पन्ने पर लिखने के बाद उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. लेकिन इन छात्राओं की बनाई मैजिकल कॉपी इस मामले में अलग है. इसके पन्नों पर लिखने के बाद उसे मिटाया जा सकता है और फिर उसी पन्ने पर दोबारा लिखा जा सकता है. इस तरह यह कॉपी कुछ हद तक स्लेट की तरह काम करती है. छात्राओं का मकसद ऐसा प्रोडक्ट तैयार करना था, जिसका ज्यादा से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर सकें और साथ ही कागज की खपत को कम करने में मदद मिले.
रिकॉर्डर से दोबारा सुन सकेंगे टीचर की बात
इस कॉपी में सिर्फ लिखने और मिटाने की सुविधा ही नहीं है. इसमें पढ़ाई से जुड़ा एक और फीचर जोड़ा गया है. अगर क्लास में कोई छात्र टीचर की पूरी बात नोट नहीं कर पाया या बाद में उस लेसन को दोबारा सुनना चाहता है, तो इसके लिए इसमें रिकॉर्डर की सुविधा दी गई है. इसके अलावा कॉपी में QR कोड भी दिया गया है, जिसकी मदद से छात्र NCERT की किताबों तक पहुंच सकते हैं. यानी एक ही कॉपी में नोट्स बनाने के साथ पढ़ाई से जुड़ी दूसरी सुविधाओं को भी जोड़ने की कोशिश की गई है.
दिल्ली के सरकारी स्कूल की छात्राओं ने बनाई जादुई कॉपी, QR कोड और वॉयस रिकॉर्डर से है लैस
— GNTTV (@GoodNewsToday) August 18, 2026
रिपोर्ट :- @Ladha25manisha#NewsPath|@shwetajhaanchor| #DelhiSchool #MagicalCopy #StudentStartup #InnovationInEducation pic.twitter.com/XeraLdLTCp
एक साल तक रिसर्च और प्रयोग के बाद तैयार हुई कॉपी
यह मैजिकल कॉपी दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय, अशोक नगर की छात्राओं मानवी, वंशिका, पूजा और जिया ने मिलकर तैयार की है. छात्राओं ने बताया कि इसे तैयार करने में करीब एक साल तक रिसर्च और कई प्रयोग किए गए. सामान्य कॉपी को मैजिकल कॉपी में बदलने के लिए छात्राओं ने इसके 20 पन्नों को लेमिनेट करवाया. इसके बाद उन्होंने इन पन्नों पर कई प्रयोग किए. जब उन्हें भरोसा हुआ कि यह आइडिया काम कर सकता है, तब इसे बाजार तक ले जाने के बारे में सोचा गया. स्कूल में शुरू हुआ यह इनोवेशन अब धीरे-धीरे एक छोटे स्टार्टअप का रूप ले रहा है.
250 रुपए रखी कीमत, अब तक 3 से 5 हजार रुपए का मुनाफा
छात्राओं ने अपनी इस मैजिकल कॉपी की कीमत 250 रुपए रखी है. उनके मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से उन्हें अब तक करीब 3 से 5 हजार रुपए का मुनाफा हुआ है. चारों छात्राओं ने इस रकम को आपस में बांटा है. हालांकि, छात्राओं का कहना है कि उनके लिए यह प्रोजेक्ट सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है.
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