scorecardresearch

पैसे दो, डिग्री लो और नौकरी पाओ! 5-10 लाख में बनती थी फर्जी मार्कशीट, खुला बड़ा रैकेट

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को सरकारी नौकरी, कॉलेज में प्रवेश और प्रमोशन दिलाने की कोशिश की जाती थी. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रैकेट से कितने लोग जुड़े हैं और कितने लोगों ने इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया.

Advertisement
फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा
हाइलाइट्स
  • मार्कशीट के दम पर सरकारी नौकरी और प्रमोशन का खेल

  • 5-10 लाख में बनती थी फर्जी मार्कशीट

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार करने वाले कथित रैकेट का खुलासा हुआ है. दुर्गापुर पुलिस की कार्रवाई में नामी विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी डिग्री, मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करने का मामला सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, इन दस्तावेजों को 5 से 10 लाख रुपए में तैयार किया जाता था. इनका इस्तेमाल सरकारी नौकरी, कॉलेज एडमिशन और प्रमोशन के लिए किए जाने की आशंका है.

पड़ोसी को दी थी कपड़े की थैली खुला फर्जी दस्तावेजों का राज
मामला जनवरी 2026 में सामने आया. पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी परिमल बाबुराव गौरकर ने अपने पड़ोसी वैभव गणपतराव माशीरकर को कार में रखी एक कपड़े की थैली सुरक्षित रखने के लिए दी थी. कुछ समय बाद जब गौरकर थैली लेने पहुंचा तो माशीरकर ने उसमें रखे दस्तावेजों के बारे में सवाल किया. पूछताछ के दौरान गौरकर ने बताया कि सरकारी नौकरी, कॉलेज में एडमिशन और प्रमोशन के लिए जरूरत के मुताबिक 5 से 10 लाख रुपए में डिग्री और डिप्लोमा तैयार किए जाते हैं. इस पर माशीरकर को शक हुआ और उन्होंने थैली की जांच की.

थैले में मिलीं ढेरों फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट
थैली की जांच में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के नाम पर तैयार की गईं डिग्रियां, मार्कशीट, सेमेस्टर मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिले. इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. पुलिस के सामने फर्जी दस्तावेजों का बड़ा जखीरा सामने आया.

पुलिस के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय, सोलापुर विश्वविद्यालय, श्रीधर यूनिवर्सिटी पिलानी, गोंडवाना विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर समेत कर्नाटक के एक विश्वविद्यालय के नाम से तैयार प्रमाणपत्र शामिल हैं. इन पर कथित तौर पर फर्जी मुहर और साइन किए गए थे.

सरकारी नौकरी में इस्तेमाल होती थी डिग्रियां
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को सरकारी नौकरी, कॉलेज में प्रवेश और प्रमोशन दिलाने की कोशिश की जाती थी. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रैकेट से कितने लोग जुड़े हैं और कितने लोगों ने इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया. पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी परिमल गौरकर के कैनरा बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक समेत चार बैंक खातों में करोड़ों रुपए के लेनदेन की जानकारी सामने आई है. पुलिस इन आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है.

दूसरे लोगों के नाम पर वाहन और नागपुर में फ्लैट की जानकारी
जांच में दोनों आरोपियों द्वारा कथित तौर पर दूसरे लोगों के नाम पर 3 से 4 वाहन खरीदने की जानकारी भी सामने आई है. इनमें से कुछ वाहनों को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया है. इसके अलावा नागपुर में करोड़ों रुपए के एक फ्लैट की जानकारी भी पुलिस को मिली है.

मुख्य आरोपी वकालत करता है, रिश्तेदार गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी परिमल बाबुराव गौरकर वकालत करता है, जबकि गिरफ्तार आरोपी वैभव सोनुले उसका रिश्तेदार बताया जा रहा है. वैभव के 12वीं पास होने की जानकारी सामने आई है. गौरकर के फरार होने के बाद पुलिस उसके संभावित ठिकानों के साथ-साथ बैंक खातों, वाहनों और दस्तावेजों से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है.

एक आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश जारी
दुर्गापुर पुलिस ने मामले में एक आरोपी वैभव सोनुले को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी परिमल बाबुराव गौरकर फरार बताया जा रहा है. पुलिस निरीक्षक संतोष शेगावकर के मार्गदर्शन में पुलिस उपनिरीक्षक रविंद्र नक्कनवार मामले की जांच कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें