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'IIT IIM में सफलता तो सिखाई जाती है, लेकिन खुश रहना नहीं...' IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

IIT दिल्ली, IIM बैंगलोर और फिर IAS बनने वाली अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखी. इस पोस्ट में उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं, जो अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

IAS officer Divya Mittal IAS officer Divya Mittal

IIT दिल्ली, IIM बैंगलोर और फिर IAS बनने वाली अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखी. पोस्ट पर उन्होंने कहा कि उनकी पढ़ाई ने उन्हें कठिन परीक्षाएं पास करना और बड़ी जिम्मेदारियां संभालना सिखाया, लेकिन मन को शांत रखना, अकेलेपन से निपटना और अपनी भावनाओं को समझना नहीं सिखाया. इस पोस्ट में उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं, जो अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

दिव्या मित्तल ने कहा कि स्कूल और कॉलेज में ज्यादातर ध्यान पढ़ाई और अंकों पर रहता है. लेकिन तनाव, दुख, असफलता और अकेलेपन को कैसे संभालना है, यह नहीं सिखाया जाता. उन्होंने यह भी कहा कि कई बार छात्र अपनी भावनाओं को दबाना सीख लेते हैं, जिससे आगे चलकर मानसिक दबाव बढ़ जाता है. आगे उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा में किताबें पढ़ना और परीक्षा देना तो सिखाया जाता है, लेकिन अपनी बात सही तरीके से रखना, किसी से 'ना' कहना या अपनी सीमाएं तय करना नहीं सिखाया जाता. उनके अनुसार ये सभी बातें जीवन में बहुत जरूरी होती हैं, लेकिन इन पर ध्यान कम दिया जाता है.

पैसों की समझ पर भी किया सवाल
इसके बाद दिव्या मित्तल ने पैसों की समझ पर भी बात की. उन्होंने कहा कि छात्र गणित पढ़ते हैं, लेकिन असल जीवन में पैसे कैसे संभालें, खर्च कैसे करें या कर्ज कैसे मैनेज करें, यह नहीं सिखाया जाता. उनके अनुसार शिक्षा केवल नौकरी पाने पर केंद्रित रहती है, पैसे को सही तरीके से संभालने पर नहीं.

उनकी इस पोस्ट के बाद कुछ लोगों ने कहा कि IIT और IIM जैसे संस्थानों में पढ़ने वाले लोग ज्यादा मौके ले लेते हैं, जिससे दूसरों के अवसर कम हो जाते हैं. इस पर दिव्या मित्तल ने जवाब दिया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और IAS की नौकरी को समाज की सेवा का हिस्सा माना है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिभा के साथ भाग्य का भी कुछ रोल होता है, लेकिन इंसान के हाथ में मेहनत करना होता है.



सोशल मीडिया पोस्ट हो रही वायरल
उनकी इस पोस्ट पर लोगों ने कई राय दी. कुछ लोगों ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली सिर्फ परीक्षा और अंकों पर ध्यान देती है, जीवन जीने के तरीके पर नहीं. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि स्कूल और कॉलेज हर चीज नहीं सिखा सकते. हालांकि, इस पोस्ट में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

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