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Success Story: पोलियो की बीमारी से हारे नहीं, बल्कि रची सफलता की नई कहानी... मिलिए JEE Advance में 22वां रैंक हासिल करने वाले सावन कुमार से

वह कहावत तो आपने सुन रखी होगी कि 'होनहार बिरवान के होत है चिकने पात.' इसी कहावत को सच कर दिखाया है बिहार के एक ऐसे छात्र ने, जिसके पिता छोटे-मोटे किसान हैं, छात्र खुद पोलियो ग्रस्त हैं, लेकिन मेहनत और बुद्धि से बहुत बलवान हैं. उनकी पढ़ाई को लेकर रुचि शुरू से थी. मेट्रिक में जहां वह टॉपर्स में से रहे हैं, वहीं JEE एडवांस में 22 रैंक हासिल करके उन्होंने सफलता की नई कहानी रची है.

JEE Advanced 2026 22nd ranker Sawan Kumar JEE Advanced 2026 22nd ranker Sawan Kumar

बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर गांव के रहने वाले सावन कुमार ने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर ऐसी सफलता हासिल की है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा बन सकती है. महज दो साल की उम्र में पोलियो की मार झेलने वाले सावन ने जेईई एडवांस्ड 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पीडब्ल्यूडी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 22 हासिल किया है. इसके अलावा उन्होंने कॉमन रैंक 17,532 और ओबीसी-एनसीएल पीडब्ल्यूडी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 9 प्राप्त किया है.

दो साल की उम्र में पोलियो, लेकिन नहीं टूटा हौसला
सावन जब केवल दो वर्ष के थे, तब पोलियो की वजह से उनके दोनों पैरों में लगभग 70 प्रतिशत लोकोमोटर डिसएबिलिटी हो गई. आज भी उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. सावन का मानना है कि किसी व्यक्ति की क्षमता उसकी शारीरिक स्थिति नहीं, बल्कि उसका आत्मविश्वास और मेहनत तय करती है. उनके मुताबिक शिक्षा ही सबसे बड़ा सशक्तिकरण का माध्यम है.

बंटाई की खेती से चलता है परिवार
सावन एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता प्रभु राय के पास अपनी खेती योग्य जमीन नहीं है और वे बंटाई पर खेती करके परिवार का खर्च चलाते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. गांव के स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद सावन ने अपनी प्रतिभा के दम पर बिहार के प्रतिष्ठित सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जमुई में प्रवेश लिया. यहां उन्होंने कक्षा 6 से 10 तक निशुल्क शिक्षा प्राप्त की. उनकी मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार बोर्ड की 10वीं परीक्षा में उन्होंने मेरिट सूची में 10वां स्थान हासिल किया.

इसके बाद सावन इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा आ गए. यहां एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने उनकी प्रतिभा और आर्थिक स्थिति को देखते हुए 80 प्रतिशत फीस स्कॉलरशिप दी. सावन का कहना है कि यह मदद उनके लिए बेहद अहम साबित हुई. उन्होंने जेईई मेन में भी 99.1473246 पर्सेंटाइल स्कोर हासिल कर अपनी काबिलियत साबित की.

IIT में पढ़ाई, फिर सिविल सेवा का सपना
सावन अब IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली या IIT मद्रास में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना चाहते हैं. उनका लक्ष्य आगे चलकर सिविल सेवा में जाना और गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिए काम करना है. उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवाएं समाज में बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं.

परिवार और शिक्षकों का मिला पूरा साथ
सावन अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को देते हैं. उनका कहना है कि परिवार ने कभी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि वे किसी से कम हैं. वहीं कोटा में शिक्षकों और फैकल्टी ने भी हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया.

एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि सावन की सफलता संघर्ष, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है. सावन की कहानी यह साबित करती है कि आर्थिक तंगी, शारीरिक चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां भी उस व्यक्ति को नहीं रोक सकतीं, जिसका इरादा मजबूत हो.

(रिपोर्ट- चेतन गुर्जर)

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