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Success Story: टाइल्स लगाने वाले कारीगर के बेटे ने फतह की JEE Advanced, अब परिवार का पहला IITian बनेंगे जय, जानें सफलता की कहानी

राजस्थान के कोटा में फ्लोर टाइल्स लगाने वाले कारीगर के बेटे जय कुमार ने जेईई एडवांस्ड में सफलता प्राप्त कर अपने शहर और घर-परिवार का नाम रोशन कर दिया है. जय की सफलता में उनके पिता का भी विशेष योगदान रहा है. यहां आप जय कुमार की सफलता की कहानी जान सकते हैं.

Jai Kumar   Jai Kumar  

देशभर में हर साल लाखों स्टूडेंट्स IIT का सपना देखते हैं, लेकिन यह सपना उन परिवारों के लिए और भी बड़ा होता है, जहां रोज की कमाई से घर का खर्च चलता है. राजस्थान के कोटा में फ्लोर टाइल्स लगाने वाले कारीगर ललित किशोर के बेटे जय कुमार ने जेईई एडवांस्ड में सफलता हासिल कर न केवल अपना सपना पूरा किया, बल्कि अपने पूरे परिवार के इतिहास में पहली बार आईआईटी तक पहुंचने का रास्ता भी बना लिया.

बड़ी थी सपनों की उड़ान 
कोटा के डीसीएम इंदिरा गांधी नगर निवासी जय कुमार ऐसे परिवार से आते हैं, जहां संसाधन सीमित थे, लेकिन सपनों की उड़ान बड़ी थी. पिता ललित किशोर फ्लोर टाइल्स लगाने का काम करते हैं. ललित को खुद आर्थिक तंगी के कारण दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने बेटे की शिक्षा के साथ कभी समझौता नहीं किया. अतिरिक्त मेहनत कर पढ़ाई का खर्च उठाया और हर दिन बेटे की तैयारी में अपनी जिम्मेदारी भी निभाई.

पिछले दो वर्षों तक उनकी दिनचर्या बेटे की पढ़ाई के इर्द-गिर्द ही रही. सुबह खुद कोचिंग छोड़ने जाते, दोपहर में टिफिन पहुंचाते और शाम को वापस घर लेकर आते. मजदूरी के साथ-साथ उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जय का पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर रहे. इस संघर्ष का नतीजा जेईई एडवांस्ड के रिजल्ट में दिखाई दिया. जय ने कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) में 8313वीं और SC वर्ग में 196वीं रैंक हासिल की. इससे पहले जेईई मेन में उनकी ऑल इंडिया रैंक 19481 और SC कैटेगरी में 553वीं रैंक रही थी. अब वह अपने संयुक्त परिवार के पहले सदस्य होंगे, जो आईआईटी में पढ़ाई करेंगे.

शुरू से ही पढ़ाई में रहे हैं मेधावी 
जय शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं. उन्होंने दसवीं में 94.3 प्रतिशत और बारहवीं में 94.8 प्रतिशत अंक हासिल किए. उनके पिता बताते हैं कि बचपन से ही बेटे की पढ़ाई में रुचि देखकर उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे जितनी मेहनत करनी पड़े, बेटे को इंजीनियर जरूर बनाएंगे. परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई के लिए हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई. ऑनलाइन पढ़ाई में कोई परेशानी न हो, इसलिए घर में इंटरनेट कनेक्शन लगवाया गया और लैपटॉप भी खरीदा गया. जय ने मोबाइल का इस्तेमाल भी केवल पढ़ाई तक सीमित रखा.

मिली बड़ी आर्थिक राहत
जय की सफलता में राजस्थान सरकार की अनुप्रति योजना भी अहम साबित हुई. नौवीं कक्षा के बाद शिक्षक गिरीश गुप्ता ने उनकी प्रतिभा पहचानकर आईआईटी की तैयारी की सलाह दी. दसवीं के बाद पिता ने कोचिंग में दाखिला दिलाकर फीस जमा की, लेकिन बाद में अनुप्रति योजना में चयन होने पर कोचिंग संस्थान ने पूरी फीस वापस कर दी. इससे परिवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली.

रोज इतने घंटे की पढ़ाई
जय बताते हैं कि उन्होंने पूरी तैयारी तय टाइम टेबल के अनुसार की. सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक कोचिंग और उसके बाद देर रात तक सेल्फ स्टडी, डाउट क्लियर और रिवीजन का सिलसिला चलता था. रोजाना करीब छह घंटे सेल्फ स्टडी और चार से पांच घंटे कोचिंग की पढ़ाई करते थे. उनके मुताबिक, सफलता की सबसे बड़ी वजह लगातार दिए गए मॉक टेस्ट रहे. शुरुआत में कम अंक आने पर उन्होंने हार नहीं मानी. हर टेस्ट के बाद गलतियों का विश्लेषण किया, शिक्षकों से डाउट क्लियर किए और लगातार सुधार करते गए. यही अभ्यास उन्हें धीरे-धीरे टॉप छात्रों की प्रतिस्पर्धा तक ले गया.

क्या है सफलता की सबसे बड़ी कुंजी
पढ़ाई के दबाव के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए जय तनाव होने पर दोस्तों से बातचीत करते या कुछ देर टहल लेते. फिर नई ऊर्जा के साथ पढ़ाई में जुट जाते. उनका मानना है कि अनुशासन, निरंतर अभ्यास और लक्ष्य पर फोकस ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. निजी कोचिंग संस्थान के सीईओ नितिन विजय कहते हैं कि कोटा केवल रैंक बनाने वाला शहर नहीं, बल्कि संघर्ष को सफलता में बदलने वाली धरती भी है. जय कुमार की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी बाधा नहीं बनते.