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भारत से दुनियाभर में पहुंची चीनी, पहले अमीरों की थी शान, अब हर इंसान करता है इस्तेमाल

इन दिनों भारत में चीनी की खूब चर्चा हो रही है. वैसे चीनी का इतिहास हजारों साल पुराना है. शुरुआत में चीनी गन्ने से निकाली जाती थी. बाद में चीनी चुकंदर से भी बनाई जाने लगी. चीनी भारत से दुनिया के तमाम हिस्सों में पहुंची. चलिए आपको चीनी की अद्भुत कहानी बताते हैं.

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देश में त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. चीनी के दाम बढ़ने की वजहों को लेकर तरह-तरह की चर्चा हो रही है. चाय से लेकर मिठाई तक में चीनी का इस्तेमाल होता है. चीनी ने इंसानों की जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीनी का ईजाद कैसे हुआ था? कहां से आई थी चीनी? किस देश में चीनी बनाने की शुरुआत हुई थी? चलिए सबकुछ बताते हैं.

गन्ने से गुड़ बनाने की शुरुआत-
गन्ने की शुरुआत 8000 ईसा पूर्व में न्यू गिनी में हुई थी. शुरुआत में लोग इसका मीठा रस चूसते थे. इसके बाद धीरे-धीरे गन्ना दूसरे क्षेत्रों में भी फैलने लगा. एशिया में भी गन्ना आया. चीन से लेकर भारत तक पहुंचा. भारत में लोगों ने गन्ने को चबाने की बजाय उसका रस निकाला शुरू किया. गन्ने के रस से गुड़ बनाने की शुरुआत हुई. इसे काफी ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा जा सकता था. इसका इस्तेमाल भी ज्यादा समय तक होने लगा.

चीनी का ईजाद कहां हुआ?
दुनिया में सबसे पहले चीनी का ईजाद भारत में हुआ. 3000 साल पहले गन्ने से चीनी बनाने का तरीका ईजाद किया गया. गन्ने के रस में इस तरह से संशोधन किया गया कि उसमें मौजूद चीनी छोटे-छोटे ठोस क्रिस्टल के तौर पर अलग होने लगे. आज इस चीनी को दानेदार चीनी के तौर पर जानते हैं. 

भारत से फारस पहुंचा चीनी का ज्ञान-
600 ईस्वी में फारस के सम्राट डेरियस प्रथम ने भारत पर हमला किया था. उस समय चीनी का जिक्र किया गया था. इसके बाद धीरे-धीरे मेसोपोटामिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में चीनी का तिलिस्म फैला. उस समय चीनी बहुत महंगी थी और इसका इस्तेमाल मसाले की तरह होता था. धीरे-धीरे चीनी चीन तक पहुंच गई. इसके बाद गन्ने खेती दक्षिण यूरोप में भी होने लगी. 800 ईस्वी से 1000 ईस्वी तक गन्ने का विस्तार यूरोप और अफ्रीका तक हुआ.

बड़े पैमाने पर होने लगा चीनी प्रोडक्शन-
11वीं सदी में घर लौट रहे क्रूसेडर्स (धर्म-युद्ध लड़ने वाले) ने इसे नया मसाला बताया. 1500 का दशक ब्राजील और कैरेबियन में चीनी उद्योग बढ़ने लगा. 16वीं सदी में पुर्तगाली कारोबारियों ने चीनी उत्पादन के लिए ब्राजील में गुलाम बनाकर लोगों को भेजने लगे. इसके बाद डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी सभी के कैरिबियन में गुलामों वाली कॉलोनियों के साथ चीनी के बागान हो गए थे.

जब यूरोपीय लोग कैरिबियन, मध्य और दक्षिण अमेरिका पहुंचे तो उन्होंने देखा कि नई जमीनें गन्ना उगाने के लिए अच्छी हैं. हिस्पैनियोला द्वीप (क्यूबा) पर 1501 में चीनी का उत्पादन शुरू हुआ. ब्राजील के तटीय इलाकों, सांता कैटरीना द्वीप, डेमरारा और सूरीनाम में 2800 से ज्यादा गन्ना मिलें स्थापित कर ली थीं.

चीनी की बढ़ी लोकप्रियता-
18वीं सदी में जब चाय और कॉफी की लोकप्रियता बढ़ने लगी तो चीनी का इस्तेमाल भी बढ़ने लगा. उस समय चीनी अमीरों, राजघरानों और विशेष वर्गों तक सीमित थी. जैसे-जैसे इसकी मांग बढ़ती गई, वैसे-वैसे इसका प्रोडक्शन भी बढ़ने लगा. इस सदी में चीनी यूरोप की बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक वस्तु बन चुकी थी.

जब फ्रांसीसी और ब्रिटिश कब्जे वाली उत्तरी अमेरिकी कॉलोनियों में चीनी का उत्पादन बढ़ने लगा तो नए मजदूरों की जरूरत ने गुलामी के दौर को जन्म दिया. गन्ने के खेतों में काम करना खतरनाक था, इसकी वजह से 30 लाख से ज्यादा अमेरिकी और अफ्रीका गुलाम मारे गए.
जैसे-जैसे कैरेबियन इलाकों में चीनी का प्रोडक्शन बढ़ने लगा, वैसे-वैसे भारत से यूरोप को चीनी की सप्लाई कम होने लगी. 

चुकंदर से चीनी बनाने की शुरुआत-
साल 1747 में जर्मन रसायनज्ञ एंड्रियास मार्ग्राफ ने चुकंदर की जड़ में चीनी की पहचान की. इसके बाद उसके चेले फ्रांज कार्ल आचार्ड ने ज्यादा चीनी वाली चुकंदर की किस्म विकसित की. 1801 में चुकंदर से चीनी बनाने वाली फैक्ट्री लगाई गई. अब यूरोप को चीनी के लिए गर्म देशों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं थी. आखिरकार यूरोप में 30 फीसदी चीनी चुकंदर से बनने लगी.

लगातार बदलता गया चीनी का प्रोडक्शन-
साल 1768 में जमैका में भाप से चलने वाली चीनी मिल की शुरुआत हो गई. इसके बाद मजदूरों का इस्तेमाल कम होने लगा. साल 1813 में एडवर्ड चार्ल्स ने वैक्यूम पैन विकसित किया. इससे गन्ने के रस को बंद पात्र में भाप से गर्म किया जाता था और इसके बाद चीनी बनाया जाता था. धीरे-धीरे चीनी में कई बदलाव भी किए गए. 

दुनिया में चीनी का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन-
दुनिया में सबसे ज्यादा चीनी का प्रोडक्शन ब्राजील करता है. वैश्विक उत्पादन में 24 फीसदी हिस्सेदारी अकेले ब्राजील की है. ब्राजील 438 लाख टन चीनी का उत्पादन करता है. जबकि भारत का नंबर दूसरा है. भारत 16 फीसदी चीनी का उत्पादन करता है. सालाना भारत 300 लाख टन चीनी उत्पादन करता है. यूरोपीय संघ तीसरे नंबर पर आता है. वैश्विक उत्पादन में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 8 फीसदी है. जबकि चीन की हिस्सेदारी 7 फीसदी है.

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