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UP Nipurnashala: यूपी के सरकारी स्कूल होंगे और भी बेहतर, हापुड़ जिले के इस एजुकेशन मॉडल से बदलेगी तस्वीर 

निपूर्णशाला एक ऐसी कक्षा है जहां पर क्रिएटिव टूल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बच्चों को पढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. यहां खेल-खेल में पढ़ाई की जाती है. अंग्रेजी, हिंदी, गणित, साइंस सभी विषय एक ही कक्षा में स्मार्ट टीचिंग की मदद से पढ़ाए जाते हैं.

UP Nipurnashala UP Nipurnashala
हाइलाइट्स
  • उत्तरप्रदेश का पहला एक्टिविटी लर्निंग सेंटर

  • सरकारी स्कूलों के लिए ग्राम पंचायत आई आगे

अक्सर माना जाता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर उतना अच्छा नहीं है जितना होना चाहिए. उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद में जिला प्रशासन ने सरकारी स्कूलों की तस्वीरों को बदलने के लिए एक नई शुरुआत की है. आईएएस प्रेरणा सिंह और उनकी टीम ने मिलकर हापुड़ के प्राथमिक विद्यालय में निपूर्णशाला एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है. इसमें तकरीबन 25 स्कूलों को शामिल किया गया है. इसका लक्ष्य था कि क्रिएटिव लर्निंग के माध्यम से इन बच्चों को बुनियादी शिक्षा में निपुण बनाया जाए. 

निपूर्णशाला एक स्मार्ट क्लास

निपूर्णशाला एक ऐसी कक्षा है जहां पर क्रिएटिव टूल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बच्चों को पढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. यहां खेल-खेल में पढ़ाई की जाती है. अंग्रेजी, हिंदी, गणित, साइंस सभी विषय एक ही कक्षा में स्मार्ट टीचिंग की मदद से पढ़ाए जाते हैं. निपूर्णशाला में बच्चे दिन के 2 से 3 घंटे बिताते हैं और खुशी-खुशी स्कूल आना भी पसंद करते हैं.

सरकारी स्कूलों के लिए ग्राम पंचायत आई आगे

हापुड़ जनपद के स्कूलों में निपूर्णशाला ग्राम पंचायत की मदद से खोली गई है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से प्रेरित होकर निपुण भारत मिशन के प्रभावशाली क्रियान्वयन हेतु जनपद हापुड़ के प्राथमिक विद्यालयों में निपूर्णशाला की स्थापना की गई. जनपद के सभी स्कूलों को एक इकाई में खड़ा किया गया. सभी अध्यापकों को निपूर्णशाला की ट्रेनिंग दी गई,  स्मार्ट डिवाइस चलने सिखाए गए, स्मार्ट टीचिंग की क्लासेज भी दी गई. इसके अलावा, लगातार टीमों के माध्यम से मॉनिटरिंग की गई. 3 महीने के पायलट प्रोजेक्ट के तहत निपूर्णशाला को बारीकी से जांचा गया. 

उत्तरप्रदेश का पहला एक्टिविटी लर्निंग सेंटर

निपूर्णशाला उत्तरप्रदेश का एक पहला एक्टिविटी बेस्ड क्रिएटिव लर्निंग सेंटर है. इसमें छात्र निपुण लक्ष्य के अनुसार भाषा में स्वर व्यंजन से लेकर वाक्य पढ़ने तक और गणित में संख्या ज्ञान से लेकर गुणा-भाग तक में दिए गए लक्ष्य को एक्टिविटी, फन, डिजिटल बेस्ड क्रिएटिव इक्विपमेंट्स की मदद से सीखते हैं.

छात्रों को रचनात्मकता और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए एक इनोवेटिव जोन भी बनाया गया है, जिसमें छात्र छोटे-छोटे एक्सपेरिमेंट कर अपनी क्रिएटिविटी को और मजबूत कर रहे हैं.

25 स्कूलों से की शिक्षा में बदलाव लाने की शुरुआत 

इन विद्यालयों को निपुण विद्यालय बनाने के लक्ष्य के साथ माइक्रो लेवल स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल कर छात्रों को रेड, येलो और ग्रीन जोन में डिवाइड किया गया, फिर छात्रों को उसी हिसाब से आगे स्मार्ट क्लासेस दी गई. निपूर्णशाला की मदद से स्कूलों में विद्यार्थियों ने लगातार आना शुरू कर दिया है. अब इन स्कूलों में छात्रों की अनुपस्थिति कम होती है और बच्चे खुद से पढ़ने की इच्छा लेकर स्कूल आते हैं.

क्या मिले परिणाम?

निपूर्णशाला का पहला फेज 90 दिनों तक चला. इसमें सामने आया कि 25 स्कूलों में निपुण छात्रों की संख्या 30% से बढ़कर 90% तक पहुंच गई है. यह परिणाम अब दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बन गया है. वहीं फेज-2 में अब 50 और स्कूलों में निपूर्णशाला खोली गई है. अब आगे का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हापुड़ जनपद में सभी स्कूलों में एक निपूर्णशाला बनाई जाए ताकि सभी स्कूलों के कक्षा पांच तक के बच्चे बुनियादी शिक्षा में बेहतर हो सकें.