लखनऊ की सारा मोइन और दिल्ली के माधव शरण की करेंगे जिनकी काबिलियत एक मिसाल बन गई है. दोनों युवाओं ने अपने हौसले से जीत की ऐसी कहानी लिखी है जो लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है. सारा ना देख सकती हैं, ना सुन सकती हैं लेकिन ICSE बोर्ड से 10वीं में 95% अंक से पास हुई हैं. वहीं माधव शरण महीनों कोमा में रहने के बाद तमाम शारीरिक चुनौतियों से लड़ते हुए 12वीं में 93% अंक से पास हुए हैं.
In This Video, Sara Moin of Lucknow and Madhav Sharan of Delhi, whose ability has become an example. Both the youth have written such a story of victory with their courage which has become an inspiration for the people. Sara can neither see nor hear but has passed ICSE board with 95% marks.