Akhilesh Yadav (Photo: PTI)
Akhilesh Yadav (Photo: PTI)
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर समाजवादी पार्टी इस बार अपने पारंपरिक 'मुस्लिम-यादव' (एम-वाई) समीकरण से आगे की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पारंपरिक आधार के साथ-साथ पीडीए और नई पीढ़ी यानी 'जेन-जी' पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करें.
अखिलेश ने अपने कार्यकर्ताओं को दिया यह संदेश
अखिलेश यादव ने हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को यही संदेश दिया. उन्होंने कहा कि पीडीए, पारंपरिक एम-वाई वोट बैंक और मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट युवा पीढ़ी (जेन-जी) की एकजुटता मिलकर सूबे में भाजपा की शिकस्त की मुख्य वजह बनेगी. सपा प्रमुख के मुताबिक, पार्टी अपने स्थापित एम-वाई जनाधार को सुरक्षित रखते हुए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्गों के बीच अपनी पकड़ को और पुख्ता कर रही है, साथ ही नए दौर के युवा मतदाताओं को भी बड़े पैमाने पर जोड़ने की दिशा में बढ़ रही है.
...तो बीजेपी की विदाई तय
अखिलेश यादव ने कहा, पारंपरिक एम-वाई आधार के साथ जब पीडीए की ताकत जुड़ेगी और जेन-जी का बढ़ता आक्रोश सामने आएगा, तो भाजपा की विदाई पूरी तरह तय है. उनके इस रुख से साफ है कि सपा केवल मुस्लिम-यादव गठबंधन तक सीमित न रहकर समाज के सभी पिछड़े, शोषित और अल्पसंख्यक तबकों का एक मजबूत मोर्चा तैयार करने में जुटी है. इसके साथ ही पार्टी 2027 के चुनावों से पहले युवाओं के बीच मौजूद नाराजगी को भी राजनीतिक समर्थन में बदलने का प्रयास कर रही है. बीते कुछ समय से अखिलेश यादव के बयानों में एम-वाई के मुकाबले 'पीडीए' शब्द पर कहीं अधिक जोर देखने को मिला है. समाजवादी पार्टी ने पीडीए के दायरे को विस्तार देकर इसमें कई अन्य सामाजिक वर्गों को समाहित किया है, ताकि भाजपा के मुकाबले एक सशक्त और समावेशी राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत किया जा सके.
BJP उठाती रहती है लगातार यह सवाल
दूसरी ओर, BJP सपा के मुस्लिम-यादव गठजोड़ पर लगातार सवाल उठाती रही है. 2022 के विधानसभा चुनाव प्रचार में भाजपा ने इस समीकरण की काट के तौर पर 'एम-वाई' को 'मोदी-योगी' की जोड़ी के रूप में प्रचारित किया था, जिसका मकसद यह दर्शाना था कि दोनों नेताओं की लोकप्रियता सपा के जातीय समीकरणों पर भारी है. इसके अतिरिक्त, भाजपा ने जातीय और धार्मिक खांचों से ऊपर उठने के लिए 'एम-वाई' की एक नई परिभाषा देते हुए इसे 'महिला और युवा' का प्रतीक भी बताया था, ताकि मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच का दायरा और बड़ा किया जा सके.