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Chandrashekhar Azad: दतिया उपचुनाव में चंद्रशेखर आजाद के उम्मीदवार को बंपर वोट! यूपी में क्या होगा असर, आखिर चंद्रशेखर किसका बिगाड़ेंगे खेल?

दतिया सीट पर हुए उपचुनाव चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के प्रत्याशी ने 22000 से ज्यादा वोट हासिल कर बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया है. इस चौंकाने वाले नतीजे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल तेज कर दी है. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर यूपी में  चंद्रशेखर आजाद किसका खेल बिगाड़ेंगे.

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Chandrashekhar Azad (Photo: PTI) Chandrashekhar Azad (Photo: PTI)

मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे में चंद्रशेखर आजाद के उम्मीदवार को 22000 से ज्यादा वोट मिलने पर यूपी के कई दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी 2027 के चुनाव में क्या गुल खिलाएगी.

सियासी हलचल तेज 
चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के प्रत्याशी ने 22000 से ज्यादा वोट हासिल कर बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया है. इस चौंकाने वाले नतीजे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल तेज कर दी है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर जारी घमासान के बीच इस नतीजे ने वहां भी नेताओं के कान खड़े कर दिए हैं. एक तरफ मायावती द्वारा वरिष्ठ नेताओं को बार-बार बाहर निकालने और वापस लेने के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं, वही चंद्रशेखर  मध्य प्रदेश में बहुजन के कैडर को अपने साथ जोड़ रहे हैं.

जातियों के समीकरण का किया खेल 
ज्ञात रहे कि 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया में बसपा और आजाद समाज पार्टी दोनों ने चुनाव लड़ा था. बसपा को 1100 वोट और चंद्रशेखर की पार्टी आजाद समाज पार्टी को 700 वोट मिले थे लेकिन इस उप चुनाव में चंद्रशेखर ने जातियों के समीकरण का खेल किया. यादव उम्मीदवार उतारा. दामोदर यादव मंडल जिससे यादव दूसरे ओबीसी और जाटव वोटों का एक समीकरण बन गया. मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश के राजनीतिक समीक्षकों को चौंका दिया है. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद बीजेपी के गढ़ मानी जाने वाली दतिया सीट पर भारतीय जनता पार्टी पिछड़ गई. हालांकि बीजेपी की इस हार में सबसे बड़ा फैक्टर बने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण.

यादव-दलित समीकरण का जादू
चंद्रशेखर आजाद ने दतिया सीट से दामोदर यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था. इस दांव के जरिए उन्होंने न केवल पारंपरिक दलित (जाटव) वोटों में सेंध लगाई बल्कि यादव बिरादरी के वोटों में भी बड़ी हिस्सेदारी हासिल की.

22000 से ज्यादा वोट बने गेमचेंजर
जब चुनाव का अंतिम ऐलान हुआ, आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी ने 22000 से ज्यादा  वोट हासिल कर लिए. बीजेपी इस सीट पर 12000 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से पीछे रही जिससे साफ हो गया कि चंद्रशेखर के प्रत्याशी की मौजूदगी ने ही बीजेपी की हार तय की.

यूपी में 45 सीटों का ऐलान
दतिया के इस प्रदर्शन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे राज्य के राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है. चंद्रशेखर ने पहले ही यूपी के 45 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. दतिया में 22000+ वोट खींचने की यह ताकत दर्शाती है कि आने वाले यूपी चुनावों में चंद्रशेखर आजाद एक 'दोधारी तलवार' साबित हो सकते हैं.

मायावती या चंद्रशेखर... दलित किसके साथ जाएगा 
मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का पुराना संगठन और आधार रहा है, खासकर कांशीराम के वक्त से ही बहुजन मिशन से जुड़े लोग बसपा के समर्थक और वोटर रहे हैं. काशीराम की सियासत में मध्य प्रदेश सबसे अहम हुआ करता था. तभी 1996 में सतना के लोकसभा सीट से सुखलाल कुशवाहा जीते थे, जिन्होंने कांग्रेस के दिग्गज अर्जुन सिंह और वीरेंद्र सकलेचा जो बीजेपी से उम्मीदवार थे, उनको हराया था यानी बसपा का एक बड़ा समर्थक तबका मध्य प्रदेश में मौजूद है. उत्तर प्रदेश से सटे जिलों में बसपा का आधार रहा है. मायावती जब इन राज्यों में उदासीन हो रही हैं तो उनकी जगह चंद्रशेखर ले रहे हैं. यही वजह है की आजाद समाज पार्टी ने 22000 से ज्यादा वोट प्राप्त कर लिए.

चंद्रशेखर के इतने वोट सिर्फ भाजपा को ही परेशान नहीं कर रहे बल्कि सपा और कांग्रेस जैसे दल भी हैरत में है क्योंकि अगर चंद्रशेखर ने अकेले लड़ना तय किया या चंद्रशेखर की बात किसी गठबंधन से नहीं बन पाई तो ऐसे में नुकसान इंडिया ब्लॉक का ज्यादा होगा क्योंकि चंद्रशेखर मीम और भीम की सियासत कर रहे हैं. अब उन्होंने ओबीसी को भी अपने साथ जोड़ लिया है. ऐसे में खतरे की घंटी सभी दलों के लिए है. देखना है उत्तर प्रदेश में बसपा के सामने रहने पर दलित क्या मायावती के साथ जाएगा या चंद्रशेखर को भी अपना समर्थन देगा.