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EVM-VVPAT Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम चुनाव कंट्रोल नहीं कर सकते, आपको भरोसा रखना होगा

सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट और ईवीएम के क्रॉस वेरिफिकेशन करवाने को लेकर सुनवाई करते हुए अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हम संदेह के आधार पर आदेश जारी नहीं कर सकते हैं.

Supreme Court (Photo: PTI) Supreme Court (Photo: PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने VVPAT-EVM मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि शीर्ष अदालत चुनाव पर कंट्रोल नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में हुई सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने VVPAT यानि वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल के साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का उपयोग करके डाले गए वोटों के पूर्ण सत्यापन की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की है.

अदालत ने कहा, 'हम चुनावों को नियंत्रित नहीं करते हैं, चुनाव निकाय यानि चुनाव आयोग ने संदेह दूर कर दिया है.' मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने की.

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को इस मामले की सुनवाई लगभग 40 मिनट चली. इस केस में याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट प्रशांत भूषण, गोपाल शंकरनारायण और संजय हेगड़े पैरवी कर रहे थे.

अदालत ने साफ तौर पर कहा कि वह चुनावों के लिए कंट्रोलिंग अथॉरिटी नहीं है और संवैधानिक अथॉरिटी भारत के चुनाव आयोग के कामकाज को निर्देशित नहीं कर सकता है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने प्रशांत भूषण से कहा, 'क्या हम संदेह के आधार पर कोई आदेश जारी कर सकते हैं? जिस रिपोर्ट पर आप भरोसा कर रहे हैं, उसमें कहा गया है कि अभी तक हैकिंग की कोई घटना नहीं हुई है. हम किसी दूसरे संवैधानिक अथॉरिटी को नियंत्रित नहीं करते है. हम चुनावों को नियंत्रित नहीं कर सकते.'

क्या हुए सवाल-जवाब
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा, 'हमने अक्सर पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों का अध्ययन किया. हम सिर्फ तीन-चार स्पष्टीकरण चाहते थे. हम तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं होना चाहते, लेकिन अपने निष्कर्षों के बारे में दोगुना आश्वस्त होना चाहते हैं और इसलिए हमने स्पष्टीकरण मांगने के बारे में सोचा.'

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील ने कहा कि पारदर्शिता के लिए ईवीएम के सोर्स कोड का भी खुलासा किया जाना चाहिए. इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा- 'सोर्स कोड का खुलासा कभी नहीं किया जाना चाहिए. अगर खुलासा हुआ तो इसका दुरुपयोग होगा. इसका खुलासा कभी नहीं किया जाना चाहिए."

संजीव खन्ना ने कहा, हम कुछ बातों पर केवल स्पष्टीकरण चाहते थे. जैसे- क्या माइक्रो कंट्रोलर कंट्रोलिंग यूनिट में होता है या फिर ईवीएम में. सिंबल लेबल यूनिट कितनी हैं. चुनाव याचिका दाखिल करने की समय सीमा 30 दिन होती है तो ईवएम सहेजने की समय सीमा 45 दिन या कम होती है. चिप कहां रहती है, क्या चिप का एक बार ही इस्तेमाल होता है. ईवीएम और VVPAT- क्या दोनों को मतदान के बाद सील किया जाता है?

इसके बाद पीठ ने संबंधित चुनाव आयोग के अधिकारी को सवालों का जवाब देने के लिए अदालत में उपस्थित रहने को कहा. वर्तमान में, वीवीपैट सत्यापन संसदीय क्षेत्र के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में केवल पांच रैंडम तरीके से चयनित ईवीएम में किया जाता है. इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में केवल पांच रैंडम चयनित ईवीएम को सत्यापित करने के बजाय सभी वीवीपैट पेपर पर्चियों की गिनती की मांग करने वाली याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था.

पता लग सकेगा किसे दिया वोट
याचिका में चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों को चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया है कि वीवीपैट सत्यापन क्रमिक रूप से किया जाएगा, यानी एक के बाद एक जिससे अनुचित देरी होगी. इसमें तर्क दिया गया कि यदि एक साथ सत्यापन किया गया और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में गिनती के लिए अतिरिक्त संख्या में अधिकारियों को तैनात किया गया, तो पूरा वीवीपैट सत्यापन केवल पांच से छह घंटे में किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस याचिका में मांग की गई कि ईवीएम में डाले जाने वाले वोट का सौ फीसदी वीवीपैट मशीन के साथ क्रॉस वेरिफिकेशन कराया जाए. इससे मतदाता पता लगा सकेगा उसने सही वोट दिया है. 

वहीं अपनी ओर से चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी परिस्थिति में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है और वीवीपैट पर्चियों की पूरी गिनती व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.