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Kerala Assembly election 2026: केरल की सियासत को कितना जानते हैं आप? किस समुदाय की कितनी ताकत, समझिए

केरल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. सूबे में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि 4 मई को नतीजे आएंगे. केरल में एझावा समुदाय की आबादी 23 फीसदी, मुस्लिम समुदाय की आबादी 26 फीसदी, ईसाई समुदाय की आबादी 18 फीसदी, नायर समुदाय की आबादी 14 फीसदी और दलित समुदाय की आबादी 9 फीसदी है. सियासी दलों की रणनीति इन मुख्य समुदायों के इर्द-गिर्द बनती है.

Sunny Joseph, Pinarayi Vijayan and Rajeev Chandrasekhar Sunny Joseph, Pinarayi Vijayan and Rajeev Chandrasekhar

5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. इसमें पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी शामिल है. केरल में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी. जबकि 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे. केरल की सियासत को समझने के लिए सूबे में एक्टिव गठबंधनों को समझना जरूरी है. इसके साथ ही मुख्य वोट बैंक को भी समझना होगा. केरल में वामदलों के गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का आमना-सामना होता है. बीजेपी की अगुवाई वाला NDA भी अपने लिए सियासी जमीन तलाश रहा है. केरल में कुछ प्रमुख समुदाय हैं, जिनको ध्यान में रखकर ही सियासी दल अपनी रणनीति बनाते हैं. चलिए आपको उन समुदायों की सियासी ताकत के बारे में बताते हैं.

एझावा समुदाय-
केरल में ओबीसी की एक प्रमुख जाति एझावा है. जिसकी सियासी ताकत बहुत बड़ी है. सूबे में इस जाति की आबादी 23 फीसदी है. इस समुदाय को पारंपरिक तौर पर LDF का वोट बैंक माना जाता है. इस वोट बैंक पर सीपीएम की मजबूत पकड़ मानी जाती है. लेकिन ये समुदाय का बड़ा संगठन SNDP Yogam ने साल 2015 में एक सियासी दल बनाया था. जिसका नाम भारत धर्म जन सेना (BDJS) है. इस बार बीडीजेएस एनडीए का हिस्सा है. साल 2021 विधानसभा चुनाव में BDJS ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और 21 सीटों पर चुनाव लड़ा था.

ईसाई समुदाय-
केरल में ईसाई समुदाय की आबादी 18 फीसदी है. ईसाई समुदाय को परंपरागत तौर पर कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF का समर्थक माना जाता है. हालांकि कुछ समर्थन यूडीएफ को भी मिलता है. उधर, बीजेपी भी इस समुदाय में अपनी पैठ बनाने में जुटी हुई है. दिल्ली में पीएम मोदी जिस तरह से चर्च में गए. इसके साथ ही बीजेपी नेतृत्व ने भी चर्चों में प्रार्थना सभाओं में हिस्सा लिया. बीजेपी को उम्मीद है कि इसका असर केरल में दिखेगा और ईसाई समुदाय के वोट बैंक का भरोसा जीतने में कामयाबी मिलेगी.

नायर समुदाय-
केरल का नायर समुदाय हिंदू उच्च जाति है. इस समुदाय की सूबे में आबादी 14 फीसदी है. यह समुदाय काफी प्रभावशाली माना जाता है. इस समुदाय का संगठन नायर सर्विस सोसायटी (NSS) की एक राजनीतिक शाखा नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी है, जो साल 1995 में यूडीएफ का हिस्सा थी. लेकिन बाद में सियासी दलों से दूरी बना ली. यह संगठन नायर समुदाय की आर्थिक-सामाजिक मजबूती के लिए काम करता है.
सियासी तौर पर नायर समुदाय काफी मजबूत है. इस समुदाय से कई बड़े लीडर आते हैं. इसमें केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर जैसे लीडर शामिल हैं.

मुस्लिम समुदाय-
केरल में मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 26 फीसदी है. ये समुदाय परंपरागत तौर पर कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ का वोट बैंक माना जाता है. इस समुदाय पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की मजबूत पकड़ है. पिछले 2 दशक में इस समुदाय से कई सियासी दल निकले हैं. लेकिन IUML जैसी पकड़ किसी की नहीं बन पाई है. IUML भी यूडीएफ का हिस्सा है. नॉर्थ केरल में मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में है. वायनाड, मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर, वाडाकारा, कासरगोड और पोन्नानी में मुस्लिम समुदाय के ज्यादा वोटर हैं.

दलित समुदाय-
केरल में दलित समुदाय की आबादी 9 फीसदी है. इस समुदाय को परंपरागत तौर पर सीपीएम की अगुवाई वाली एलडीएफ का समर्थक माना जाता है. हालांकि अच्छा-खासा वोट यूडीएफ को भी जाता है.

केरल में मुख्य सियासी लड़ाई यूडीएफ और एलडीएफ के बीच होती है. लेकिन बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए भी विधानसभा चुनाव की लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है. बीजेपी नायर, एझावा और दलित समुदाय को अपने पाले में करने के लिए काम कर रही है.

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