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Happy Birthday Jaya Bachchan: जया बच्चन के वह सदाबहार गाने, जिन्हें सुनते ही किसी को भी हो जाए संगीत से प्यार

जया भादुरी बच्चन, एक ऐसा नाम जिसने हिंदी फिल्मों में अपनी सादगी से नई पहचान बनाई और फिर राजनीति में भी अपना लक आजमाया. समाजवादी पार्टी से उनका राजनीतिक सफर 2004 में शुरू हुआ था और तब से वह लगातार चार बार राज्यसभा की सदस्य बनी हुई हैं.

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Happy Birthday Jaya Bachchan Happy Birthday Jaya Bachchan

अप्रैल 9, 1948 को जबलपुर के एक बंगाली परिवार में जन्मी जया का पूरा नाम जया भादुरी बच्चन है. उनके पिता तरुण भादुरी लेखक, पत्रकार और स्टेज आर्टिस्ट थे, जबकि मां इंदिरा भादुरी ने हमेशा उन्हें रचनात्मक माहौल दिया. कला और साहित्य से भरे इस परिवार ने जया के व्यक्तित्व को बहुत शुरुआती उम्र में ही गढ़ दिया.

15 साल की उम्र में रखा पहला कदम
सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्होंने सत्यजीत रे की बंगाली फिल्म महानगर में छोटी-सी भूमिका निभाई. फिर मुंबई आने के बाद जया ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा. जवानी दीवानी, उपहार, अनामिका, अभिमान, शोले, बावर्ची, चुपके चुपके, जंजीर जैसी फिल्मों ने उन्हें 70 के दशक में अपने प्रशंसकों के दिलों पर खूब राज किया.  लंब ब्रेक से पहले उनकी आखिरी फिल्म सिलसिला (1981) साबित हुई, जिसके बाद उन्होंने लंबे समय के लिए फिल्मों से दूरी बनाई. हालांकि 18 साल बाद जया बच्चन जब वापस लौटीं, तो एक बार फिर दर्शकों ने उन्हें उतने ही प्यार से स्वीकार किया.

वहीं बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि शहंशाह (1988) की कहानी भी जया ने ही लिखी थी, जिसमें उनके पति अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका निभाते नजर आए. इसी के साथ 70 के दशक में जया ने खुद भी एक्टिंग के माध्यम से कई हीट फिल्में बॉलीवुड को दी, जिनके गाने आज भी सुन कर नए जैसे लगते हैं. जिन्हें सुन कर हर कोई जीवन में एक बार प्यार करना तो जरूर चाहता है. 

जया बच्चन के 20 सदा बहार गाने
रील में वायरल हुआ गाना 'चले ही जाना है, नजर चुरा के यूं, फिर थामी थी साजन तुम ने मेरी कलाई क्यों?' हो, या अभिमान फिल्म का ये गाना 'तेरे मेरे मिलन की ये रैना' हर गाने में जया ने अपने अभिनय से एक अलग छाप छोड़ दी. उनके एक्सप्रेशन, और जेस्चर उन गानों में जैसे प्राण की तरह समाए हो. आज हम उनके कुछ सदा बहार गानों पर नजर डालेंगे. 

तेरी बिंदिया रे - अभिमान (1973)


तेरे मेरे मिलन की ये रैना - अभिमान (1973)
बांहों में चले आओ - अनामिका (1973)
बोले रे पपीहरा - गुड्डी (1971)
अब तो है तुमसे हर खुशी अपनी - अभिमान (1973)
पिया बिना पिया बिना - अभिमान (1973)
बीती ना बिताई रैना - परिचय (1972)
मैंने कहा फूलों से - मिली (1975)


लोटे कोई मन का नगर - अभिमान (1973)
ये ज़ुल्फ कैसी है - पिया का घर (1972)
पट्‌टा पट्‌टा बूटा बूटा - एक नजर (1972)
मेरा जीवन कोरा कागज - कोरा कागज (1974)
मैं ने देखा एक सपना - समाधि (1972)
जाने जां ढूंढता फिर रहा - जवानी दीवानी (1972)
रूठे रूठे पिया - कोरा कागज (1974)
सामने ये कौन आया - जवानी दीवानी (1972)
हाथों में मेहंदी - यादों की बारात (1973)
नदिया किनारे - अभिमान (1973)


बागों में कैसे ये फूल - मिली (1975)
आए तुम याद मुझे - मिली (1975)

 

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