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अमरावती में रक्त तुला का चमत्कार: गौ माता के नाम पर उमड़ा जनसैलाब, 1400 यूनिट रक्तदान से बनी नई मिसाल

महाराष्ट्र के अमरावती से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जो आस्था के साथ-साथ मानव सेवा का अनूठा संदेश देती है. अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर यहां ‘गौ माता रक्त तुला’ का आयोजन किया गया. एक ऐसा उपक्रम, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

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महाराष्ट्र के अमरावती से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जो आस्था के साथ-साथ मानव सेवा का अनूठा संदेश देती है. अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर यहां ‘गौ माता रक्त तुला’ का आयोजन किया गया. एक ऐसा उपक्रम, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

इस अनोखे आयोजन में गौ माता के वजन के बराबर रक्त एकत्र करने का संकल्प लिया गया था. करीब 300 किलो वजनी गाय के लिए लगभग 900 यूनिट रक्त की आवश्यकता थी, लेकिन लोगों के उत्साह और सेवा भावना ने इस लक्ष्य को भी पीछे छोड़ दिया. कुल मिलाकर करीब 1400 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जिसे बाद में सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में जमा कराया गया, ताकि जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सके.

सैकड़ों लोग हुए शामिल
गर्मी के दिनों में अस्पतालों में अक्सर खून की कमी देखने को मिलती है. ऐसे समय में यह पहल न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि मानव जीवन बचाने का बड़ा माध्यम भी साबित हुई. इस आयोजन में अमरावती शहर और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग शामिल हुए. हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने. कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धा, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला.

इस अवसर पर अंजनगांव के परम पूज्य आचार्य जितेंद्र नाथजी महाराज की विशेष उपस्थिति रही. उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, गौ माता हमारी राष्ट्र माता हैं. हर गौ रक्षक ने जो रक्तदान किया है, वह अत्यंत सराहनीय है. शास्त्रों के अनुसार गौ माता में 33 करोड़ देवताओं का वास माना गया है. उनके संरक्षण और मानव सेवा के लिए किया गया यह उपक्रम पूरे देश में होना चाहिए.'

बता दें कि, इससे पहले हनुमान जयंती के अवसर पर भी शहर में विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए थे. अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ, गोरक्षण संस्था, गैस सम्मान रक्तदान समिति, महेश्वरी पंचायत और रामचरितमानस परिषद के संयुक्त तत्वावधान में हुए. इन शिविरों ने इस ‘रक्त तुला’ अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आज अमरावती की यह पहल सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सेवा के लिए प्रेरित करने वाली मिसाल बन गई है. धार्मिक आस्था और मानवता के इस संगम की गूंज अब पूरे महाराष्ट्र में सुनाई दे रही है और यह संदेश दे रही है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है. 

रिपोर्टर:  धनंजय साबले

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