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बचपन में सुने किस्सों से बदली सोच, 20 सालों से हरियाली है जीवन.. जानें ग्रीन मैन विजय पाल बघेल की कहानी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले विजय पाल बघेल ग्रीन मैन ऑफ इंडिया के नाम से जाने जाते हैं. साल 1976 में बघेल ने पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा का अभियान शुरू किया. 1993 में ये काम एक व्यापक आंदोलन बन चुका था. उन्होंने ‘पर्यावरण सचेतक समिति’ का गठन किया और ‘मेरा वृक्ष’ योजना की शुरुआत की. इसके तहत उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया.

Vijay Pal Baghel Vijay Pal Baghel

यूं तो वन देवी, हरा आदमी, ग्रीन मैन सब मिथक और कल्पना ही हैं. लेकिन दुनिया में ऐसे लोग भी हैं, जो प्रकृति से पेड़-पौधों से इतना प्रेम करते हैं कि अपने प्रेम के जुनून में वो ऐसा कुछ कर कर जाते हैं, जो उन्हें ग्रीन कर देता है. गाजियाबाद के विजय पाल बघेल अपने ग्रीन वर्क के चलते ग्रीन मैन ऑफ इंडिया के रुप में पहचाने जाते हैं.  

ग्रीन मैन विजय पाल-
विजय पाल बघेल यूपी के गाजियाबाद में रहने वाले हैं. देश उनको ग्रीन मैन ऑफ इंडिया के नाम से जानता है. प्रकृति प्रेमी विजय पाल हरे रंग में ऐसे डूबे कि पिछले 20 साल से उनके कपड़े हरे हैं. जूते, पेन और रोजमर्रा की चीजें हरी हैं. हरा रंग उनकी पहचान बन चुका है. वो खुद हरे हो गए हैं. हरा आदमी बन चुके हैं यानि ग्रीन मैन हैं. 
  
करोड़ों पेड़ लगा चुके हैं विजय-
बचपन से आज तक ये ग्रीन मैन देश भर में करोड़ों पेड़ लगा चुके हैं. लाखों पेड़ों को कटने से बचाया है. पर्यावरण से प्रेम की इस बुजुर्ग शख्स विजय पाल बघेल की कहानी एक व्यक्ति के आंदोलन बन जाने की कहानी है. 

ग्रीन मैन ने सिटी फॉरेस्ट में अर्जुन, जामुन, नीम, पीपल, बरगद और अमलतास जैसे पेड़ लगाए हैं. यहां की मिट्टी में वहीं पौधे लगाए गए, जो अब भरे पूरे और हरे हो चुके हैं. 

लगाव के पीछे बचपन के किस्से-
हरियाली से प्यार, पेड़-पौधों की सुरक्षा और उनसे असीम लगाव के पीछे विजय पाल बघेल के बचपन की एक संवेदनशील कहानी छिपी है. बचपन में एक पेड़ के आंसू को महसूस करते हुए उसे बचाते हुए वो अपना और प्रकृति का रिश्ता समझ गए और तभी से पेड़ पौधों की सुरक्षा उनका मिशन ए जिंदगी बन गया. 

इतना ही नहीं, बचपन में पहाड़ों पर चल रहे बाबा आम्टे के चिपको आंदोलन, जिसमें लोग पेड़ काटने से रोकने के लिए पेड़ों को पकड़ के चिपक जाते थे. जिसने उन्हें प्रभावित किया. दादाजी ने राजस्थान के खेजलड़ी गांव की कहानी भी उनको सुनाई थी, जहां 1730 ई. में खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए बिश्नोई समाज के एक-दो नहीं, बल्कि 363 लोगों ने जान दे दी. उनके बाल मन पर हुए असर ने उन्हें प्रकृति के सरंक्षण के लिए प्रेरित किया. 

ग्रीन मैन के 'ग्रीन वर्क'
साल 1976 में बघेल ने पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा का अभियान शुरू किया. 1993 में ये काम एक व्यापक आंदोलन बन चुका था. उन्होंने ‘पर्यावरण सचेतक समिति’ का गठन किया और ‘मेरा वृक्ष’ योजना की शुरुआत की. इसके तहत उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया. विजय पाल के प्रयास यहीं नहीं रुके. उन्होंने ‘ऑपरेशन ग्रीन’, ‘ग्लोबल ग्रीन मिशन’, ‘मेरा पेड़ मेरी शान’, ‘मिशन सवा सौ करोड़’, और ‘पेड़ लगाएं, सेल्फी भेजें’ जैसे कई आंदोलनों की शुरुआत की. साथ ही वो ग्लोबल ग्रीन पीस मिशन के तहत देश भर में वृक्षारोपण और संरक्षण के कार्य को बढ़ावा दे रहे हैं. विजय पाल की ‘गुल्लक स्कीम’ भी हरियाली बचाने के उनके प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. जिसमें वो लोगों को फलों के बीजों को संरक्षित करने और उन्हें पक्षियों का आहार बनाने के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि प्रकृति के चक्र को बनाए रखा जा सके.
 
कई बार सम्मानित हो चुके हैं बघेल-
ग्रीन मैन विजय पाल बघेल को उनके इन हरित कामों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. जिनमें हरित ऋषि, जेपी अवार्ड, ग्रीन मैन और हिमालय भूषण शामिल हैं. ग्रीन मैन बघेल से ग्रीन मैन ऑफ इंडिया कहलाना भी उनके लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं है. भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं. वो कलाम ही थे, जिन्होंने उनसे कहा कि तुम्हारा मन इतना हरा है तो तुम्हारा तन भी हरा होना चाहिए. बस तभी से उन्होंने खुद पर हरा रंग डाल लिया और हरे हो लिए और अब ये हरा आदमी सबको कहता है कि बस पेड़ लगाओ.

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