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घर बैठे कमाई, साथ में पर्यावरण की चिंता, 17 साल की राहिणी की पहल से बदल रही 250 महिलाओं की जिंदगी

नोएडा की 17 साल की राहिणी बंसल ने 'सूत्रधार' पहल के जरिए 250 से ज्यादा महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और बुनाई का हुनर सिखाकर रोजगार से जोड़ा है. खास बात यह है कि टेक्सटाइल वेस्ट की कतरन का दोबारा इस्तेमाल कर महिलाओं को घर बैठे कमाई का मौका दिया जा रहा है. राहिणी की यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मिसाल पेश कर रही है.

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नोएडा की रहने वाली 17 साल की राहिणी बंसल अभी 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन उनकी सोच और काम किसी बड़े सामाजिक बदलाव से कम नहीं है. राहिणी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पर्यावरण बचाने की भी पहल शुरू की है. उन्होंने साल 2024 में 'सूत्रधार' नाम से एक पहल शुरू की, जिसके जरिए गांव की महिलाओं और लड़कियों को सिलाई, कढ़ाई और बुनाई जैसी स्किल्स सिखाई जाती हैं. इसके बाद उन्हें घर से काम करने का मौका भी दिया जाता है.

6 महिलाओं से शुरू हुआ सफर, अब 250 से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं
राहिणी ने जब 10वीं कक्षा में पढ़ाई शुरू की, तभी महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने का फैसला किया. साल 2024 में उन्होंने सिर्फ 6 महिलाओं के साथ 'सूत्रधार' की शुरुआत की थी. आज इस पहल से 250 से ज्यादा महिलाओं की कम्युनिटी जुड़ चुकी है. राहिणी इन महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और बुनाई की ट्रेनिंग देती हैं और उनके लिए काम भी उपलब्ध कराती हैं.

घर बैठे महिलाएं कर रही हैं काम
सूत्रधार से जुड़ी महिलाओं को काम करने के लिए किसी फैक्ट्री या ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होती. वे अपने घर से अपनी सुविधा के मुताबिक कुछ घंटे काम कर सकती हैं. इस काम से महिलाएं करीब 4 हजार से 25 हजार रुपये महीने तक कमा रही हैं. इससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिल रही है.

किसी के बच्चों की पढ़ाई, तो किसी के सपनों को मिली उड़ान
45 साल की शोभा पहले कोई काम नहीं करती थीं. अब वह अपने हुनर से कमाई कर रही हैं और अपनी आय से बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रही हैं. चंदा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. अपनी कमाई शुरू करने के बाद वह बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ज्यादा बेहतर तरीके से कोशिश कर पा रही हैं. वहीं, प्राची के लिए यह काम सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है. वह अपनी कमाई से बीए की पढ़ाई कर रही हैं और आगे फैशन डिजाइनर बनना चाहती हैं. मोनिका अपनी कमाई से अपने भाई को कंप्यूटर सिखा रही हैं. यानी एक महिला की कमाई पूरे परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने में मदद कर रही है.

घरेलू हिंसा झेल चुकी महिलाओं को भी मिला सहारा
सूत्रधार से जुड़ी कुछ महिलाओं ने घरेलू परेशानियों और हिंसा जैसी मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है. ऐसे में खुद की कमाई शुरू करना उनके लिए बड़ा बदलाव साबित हुआ. आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उन्हें अपने जीवन को नए सिरे से बेहतर बनाने का हौसला दिया.

कपड़ों की कतरन से पर्यावरण बचाने की कोशिश
राहिणी की पहल सिर्फ महिलाओं को रोजगार देने तक सीमित नहीं है. टेक्सटाइल इंडस्ट्री से निकलने वाली कपड़ों की कतरन को फेंकने के बजाय इन महिलाओं तक पहुंचाया जाता है. महिलाएं इन्हीं कतरनों से शर्ट और दूसरी उपयोगी चीजें तैयार करती हैं. इससे कपड़ों के कचरे को कम करने और उसे दोबारा इस्तेमाल करने में मदद मिलती है. 17 साल की राहिणी ने अपनी पहल से दिखाया है कि बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है. ‘सूत्रधार’ के जरिए वह एक साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और टेक्सटाइल वेस्ट कम करने की कोशिश कर रही हैं. यहां कपड़ों की कतरन से सिर्फ नए उत्पाद नहीं बन रहे, बल्कि महिलाओं के लिए नए अवसर भी बुने जा रहे हैं.

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