scorecardresearch

द‍िल्ली AIIMS में संडे को भी द‍िल के मरीजों के ल‍िए खुलेगी ओपीडी

म्स में पहली बार रविवार को कोई क्लिनिक या ओपीडी शुरू की जा रही है. इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि बाकि दिन काम की वजह से जो मरीज इलाज के लिए नहीं पहुंच पाते थे  उन्हें अब रविवार को इलाज मिल जाएगा.

कार्डिएक थोरोसिक विभाग के डॉक्टर की होगी ड्यूटी कार्डिएक थोरोसिक विभाग के डॉक्टर की होगी ड्यूटी
हाइलाइट्स
  • एम्स में पहली बार रविवार को ओपीडी की शुरुआत

  • कार्डिएक थोरोसिक विभाग के डॉक्टर की होगी ड्यूटी

  • एक ही दिन में जांच और चेकअप दोनों होंगे

दिल्ली एम्स (AIIMS) से एक खुशखबरी आई है. एम्स में अब संडे को भी ओपीडी लगेगी. हार्ट के वॉल्व से जुड़े मरीजों के लिए फॉलोअप ओपीडी लगाई जाएगी, जिसमें एंटीकॉगुलेशन यानी खून पतला करने वाली दवा में जो मरीज हैं, उन्हें इलाज की सुविधा मिलेगी.  रविवार 17 अक्टूबर को पहली एंटीकॉगुलेशन क्लिनिक की शुरूआत की जाएगी. 

एम्स में पहली बार रविवार को ओपीडी की शुरुआत
एम्स में पहली बार रविवार को कोई क्लिनिक या ओपीडी शुरू की जा रही है. इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि बाकि दिन काम की वजह से जो मरीज इलाज के लिए नहीं पहुंच पाते थे  उन्हें अब रविवार को इलाज मिल जाएगा. मंगलवार को एम्स के कार्डिएक थोरासिक विभाग के एचओडी डॉक्टर शिव कुमार चौधरी और सेंटर की चीफ डॉक्टर अनिता सक्सेना की तरफ से यह आदेश जारी किया गया है. 

स्पेशल एंटीकॉगुलेशन क्लिनिक की होगी शुरूआत 

वॉल्व सर्जरी करा चुके मरीजों को अक्सर खून पतला कराने की जरूरत पड़ती रहती है , जिसके लिए  उन्हें बार-बार एम्स में आना पड़ता है. ये फैसला ऐसे ही मरीजों के लिए किया गया है. इस आदेश के अनुसार, पहली क्लिनिक 17 अक्टूबर रविवार को शुरू होगी और हर रविवार को लगेगी. सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक यह ओपीडी होगी. मरीज सुबह 9 से शाम तीन बजे तक अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. ऑनलाइन और वॉकइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी. 

कार्डिएक थोरोसिक विभाग के डॉक्टर की होगी ड्यूटी

यह क्लिनिक एम्स के सीएन सेंटर के ग्राउंड फ्लोर के रूम नंबर नंबर-20 और 21 में चलेगा.  इलाज के लिए कार्डिएक थोरोसिक विभाग के दो सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर और एक फैकल्टी की ड्यूटी होगी. डॉक्टरों की ड्यूटी रोटेशन लेवल पर लगेगी. खून पतला कराने के लिए आए मरीजों को इलाज मिलने में  मिलने में दो-तीन दिन लग जाते हैं, क्योंकि प्रक्रिया लंबी होती है.  इस दौरान उन्हें पहले खून की जांच, एंजियोग्राफी और सिने जांच करानी होती है.  

एक ही दिन में जांच और चेकअप दोनों 
यह क्लिनिक लगभग 8 घंटा चलेगा,  तो मरीज उसी दिन पहले दिखा सकते हैं, जांच करा सकते हैं और फिर उसी दिन दिखा भी सकते हैं.  कुल मिलाकर एक ही दिन में मरीज को पूरा ट्रीटमेंट देने का लक्ष्य है.