
125 घरों में फ्री जैसी है बायोगैस
125 घरों में फ्री जैसी है बायोगैस
इजरायल-अमेरिका-ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध को एक महीना बीत चुका है, लेकिन इसका असर दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी साफ दिख रहा है. एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है और कई राज्यों में गैस सिलेंडर को लेकर भारी किल्लत की खबरें आ रही हैं. लोग गैस पाने के लिए घंटों कतार में खड़े हो रहे हैं. लेकिन इसी संकट के बीच उत्तर प्रदेश का चंदौली जिला का एकौनी गांव एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है, क्योंकि यहां LPG की कमी का कोई असर नहीं हुआ. वजह है यहां लगा बायोगैस प्लांट, जो गांव के 125 घरों की रसोई लगातार रोशन कर रहा है.
गांव में LPG की नहीं, बल्कि बायोगैस की सप्लाई जारी
एक ओर जहां देश के अलग-अलग हिस्सों में एलपीजी के लिए मारामारी है, वहीं चंदौली के एकौनी गांव के लोग बिल्कुल निश्चिंत हैं. गांव में लगे बायोगैस प्लांट से: सुबह 3 घंटे और शाम 3 घंटे यहां नियमित रूप से गैस सप्लाई की जाती है, और लोग आराम से खाना पका रहे हैं. गांव के तकरीबन 150 परिवारों में से 125 परिवार बायोगैस पर निर्भर हैं, और LPG संकट के इस दौर में खुद को बेहद भाग्यशाली मान रहे हैं.
चार साल पुरानी पहल बनी संकट में संजीवनी
आज से ठीक 4 साल पहले गांव के चंद्र प्रकाश सिंह नाम के युवक ने इस बायोगैस प्लांट की नींव रखी थी. उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि भविष्य में LPG की इतनी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी. लेकिन आज, यही प्लांट पूरे गांव के लिए जीवनरक्षक साबित हो रहा है. गृहणियों को अब लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ता.
कंचन सिंह, बायोगैस उपभोक्ता का कहना
'जब कनेक्शन लगा था तो लगा कि बस एक आसान विकल्प मिल गया है. लेकिन अब जब LPG का संकट आ गया है, हमें इसकी असली अहमियत समझ आई है. हम लोग न कोई लाइन लगा रहे हैं, न कोई परेशानी. पहले इंडक्शन भी 2000 का आता था, अब 4000-5000 में मिल रहा है. ऐसे में बायोगैस सबसे कंफर्टेबल और आसान विकल्प है.'
अखिलेश सिंह, बायोगैस उपभोक्ता
'युद्ध की वजह से LPG में दिक्कत है, लेकिन हमारे घर में खाना आसानी से बन रहा है. बायोगैस सस्ती भी है और सुविधाजनक भी. आज की स्थिति में यह हमारे लिए संजीवनी है. अगर यह न होता तो हमें भी लंबी लाइनों में लगना पड़ता.'
युवा इंजीनियर जिसने गांव की तस्वीर बदल दी
एकौनी गांव के चंद्र प्रकाश सिंह ने इंदौर से B.Tech किया था. पढ़ाई के बाद उन्होंने नौकरी न करने का फैसला किया और गांव वापस लौटकर अपने पिता की गौशाला संभालने लगे. पिता की गौशाला में पहले 50 गायें थीं. चंद्र प्रकाश ने इसे बढ़ाकर 200 गायों तक पहुंचा दिया. गौशाला में रोज 3000 किलो गोबर निकलता था, जो बेकार जा रहा था. यहीं से उनके मन में बायोगैस प्लांट का विचार आया.

गांव ने दिया साथ, और बन गया बड़ा प्लांट
चंद्र प्रकाश ने गांव वालों से बात की कि यदि गोबर गैस प्लांट लगाया जाए और घरों तक बायोगैस सप्लाई दी जाए, तो क्या वे कनेक्शन लेंगे? गांव वालों ने इसे सराहा और 2022 में बायोगैस प्लांट बनकर तैयार हुआ. आज यह प्लांट 125 घरों को गैस देता है, LPG की तुलना में लगभग आधी कीमत में और गोबर का 100% उपयोग भी हो जाता है.
युद्ध का असर देश भर पर, लेकिन एकौनी गांव सुरक्षित
मिडिल ईस्ट वार की वजह से पूरे देश में LPG की उपलब्धता पर असर पड़ा है, लोग घंटों लाइन में खड़े दिखाई दे रहे हैं. लेकिन एकौनी गांव के लोग इस संकट से पूरी तरह सुरक्षित हैं.
ये भी पढ़ें