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73 साल में पहली बार हिंदू लड़की पाकिस्तान में प्रशासनिक सेवा के लिए चुनी गई

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार एक हिंदू लड़की ने मुल्क के सबसे मुश्किल एग्जाम को पास करने में कामयाब हुई है. CSS एग्जाम को बेहद कठिन माना जाता है. इसमें इस साल कुल 2% कैंडिडेट्स ही कामयाबी हासिल कर पाए हैं.

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सना रामचंद गुलवानी - फोटो : सोशल मीडिया सना रामचंद गुलवानी - फोटो : सोशल मीडिया
हाइलाइट्स
  • पाक में हिंदू लड़की प्रशासनिक सेवा के लिए चुनी गई

  • डॉ. सना रामचंद गुलवानी ने CSS एग्जाम पहले प्रयास में पास किया

  • 73 साल में पहली बार हिंदू लड़की पाक के एडमिनिस्ट्रेशन में जाएगी

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार एक हिंदू लड़की ने मुल्क के सबसे मुश्किल एग्जाम को पास करने में कामयाब हुई है.  27 साल की डॉक्टर सना रामचंद गुलवानी ने सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेस की परीक्षा को मई में ही क्लियर कर लिया था, लेकिन अब उनकी नियुक्ति पर भी मुहर लग गई है. 27 साल की सना ने अपने पहले ही प्रयास में पाकिस्तान की सबसे मुश्किल माने जाने वाली यह परीक्षा पास की है. 

पाकिस्तान में प्रशासनिक सेवा में हिंदू लड़की 

भारत से अलग होने के बाद से पाकिस्तान में अब तक कोई हिंदू लड़की प्रशासनिक सेवाओं में नहीं रही है. सना मूल रूप से शिकारपुर की रहने वाली हैं. उन्होंने  सिंध प्रांत की रूरल सीट से इस परीक्षा में हिस्सा लिया था.  यह सीट पाकिस्तान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेट के अंतर्गत आती है.

सना इससे पहले सना सर्जन के रूप में पाकिस्तान में काम कर रही हैं. पांच साल पहले उन्होंने बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ मेडिसिन की डिग्री ली थी. सना ने सिंध प्रांत की ग्रामीण सीट से इस परीक्षा में हिस्सा लिया था. यह सीट पाकिस्तान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस के अंतर्गत आती है. 

पहले प्रयास में सीएसएस परीक्षा की पास  

बता दें, CSS एग्जाम को बेहद कठिन माना जाता है. इसमें इस साल कुल 2% कैंडिडेट्स ही कामयाबी हासिल कर पाए हैं.  सना के मामले में सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इसे पहले अटैम्प्ट में ही क्रैक कर लिया. सना का कहना है कि पहले ही प्रयास में इस परिक्षा को पास करने से काफी खुश हैं. उन्होंने इस एग्जाम को क्लियर करने की ठान ली थी और इसके लिए शुरू से काफी मेहनत की. 

73 साल में पहली बार हिंदू लड़की पाकिस्तान के एडमिनिस्ट्रेशन में जाएगी 

मेडिकल से अपनी पढ़ाई करने वाली सना गुलवानी ने बताया कि उनके माता-पिता कभी नहीं चाहते थे कि वो प्रशासनिक सेवा में जाएं. उनका मन था कि मैं मेडिकल क्षेत्र में सेवाएं दूं. इसलिए मैंने पहले पैरेंट्स के टारगेट को पूरा किया. इसके बाद मैं अपने टारगेट में जुट गई.