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महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के श्रीगोंदा तहसील स्थित कोलगांव गांव में ग्राम पंचायत ने एक अनोखा और सख्त फैसला लिया है. गांव में रोजमर्रा के झगड़ों में इस्तेमाल होने वाली मां-बहन से जुड़ी अपमानजनक गालियों को रोकने के लिए पंचायत ने नया नियम लागू किया है. इस नियम के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी को संबोधित करते हुए ऐसी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करता पाया जाता है, तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.
स्वयं सहायता समूह की सदस्य की पहल
गांव के किसान परिवार से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की सदस्य पूजा जगताप ने ग्रामसभा के सामने इस मुद्दे को सामने रखा. उन्होंने सवाल उठाया कि मामूली विवादों में मां और बहन से जुड़े अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल इतना आम क्यों हो गया है और समाज इसे अब तक सहन क्यों करता आ रहा है. उनके इस सुझाव पर गांव की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों के बीच व्यापक चर्चा हुई, जिसके बाद इस पर औपचारिक प्रस्ताव लाकर सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया.
डिजिटल सबूत होने पर ही लगेगा जुर्माना
पंचायत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस नियम का दुरुपयोग न हो. इसलिए किसी भी व्यक्ति पर जुर्माना तभी लगाया जाएगा जब घटना का ऑडियो या वीडियो सबूत उपलब्ध हो. यदि कोई ग्रामीण किसी को ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हुए रिकॉर्ड कर लेता है, तो वह सबूत पंचायत के सामने प्रस्तुत कर सकता है. जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.
महिलाओं को सौंपी गई जिम्मेदारी
गांव के सरपंच पुरुषोत्तम लगड़ के अनुसार, यह प्रस्ताव गांव की महिलाओं की ओर से आया है. उन्होंने बताया कि पंचायत ने महिलाओं और जरूरत पड़ने पर उनके बच्चों को भी ऐसे मामलों की पहचान करने और पंचायत को सूचित करने की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित किया है. जुर्माने से मिलने वाली राशि गांव के विकास कार्यों में खर्च की जाएगी.
स्वच्छता पर भी लिया गया निर्णय
इसी ग्रामसभा में स्वच्छता को लेकर भी एक प्रस्ताव पारित किया गया. इसके तहत ग्रामीणों से अपने घरों और दुकानों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है. यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. इस मामले में भी फोटो सबूत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.