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रिटायरमेंट के दिन जज ने किया अनोखा संकल्प, अपना शरीर और 1.01 करोड़ रुपये की जमा पूंजी समाज को की समर्पित

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने ऐसा ही एक प्रेरणादायक फैसला लेकर सभी का ध्यान खींचा है. अपने विदाई समारोह में जस्टिस सिंह ने देहदान का संकल्प लेने के साथ अपनी GPF की पूरी राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की.

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jabalpur High Court Judge jabalpur High Court Judge

समाज और देश के लिए पूरी जिंदगी काम करने के बाद रिटायरमेंट के समय अपनी जमा पूंजी और शरीर तक समाज को समर्पित करने का फैसला कम ही लोग लेते हैं. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने ऐसा ही एक प्रेरणादायक फैसला लेकर सभी का ध्यान खींचा है. अपने विदाई समारोह में जस्टिस सिंह ने देहदान का संकल्प लेने के साथ अपनी GPF की पूरी राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की.

पत्नी की इच्छा का किया सम्मान
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह गुरुवार को रिटायर हुए. हाईकोर्ट में आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल कार्यक्रम में उन्होंने अपनी पत्नी इंदिरा के साथ देहदान करने की घोषणा की. इसके अलावा उन्होंने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपये की GPF राशि भी प्रधानमंत्री राहत कोष में देने का फैसला किया. जस्टिस सिंह ने कहा कि उनकी पत्नी इंदिरा की इच्छा थी कि वे समाज के लिए कुछ करें. उनकी भावना का सम्मान करते हुए उन्होंने यह संकल्प लिया है. उन्होंने कहा कि जैसे ही GPF की राशि उनके खाते में आएगी, वह उसे तत्काल राहत कोष में ट्रांसफर कर देंगे.

विदाई समारोह में कई बार हुए भावुक
अपने विदाई भाषण के दौरान जस्टिस सिंह कई बार भावुक नजर आए. उन्होंने अपने निजी स्टाफ, हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और रिश्तेदारों समेत उन सभी लोगों को याद किया, जिनका उनके जीवन में महत्वपूर्ण योगदान रहा. एक भावुक पल में जस्टिस आनंद पाठक ने उनकी पीठ पर हाथ फेरकर उन्हें ढांढस बंधाया.

करीब 3 साल में 8788 मामलों का किया निपटारा
चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने कहा कि जस्टिस सिंह को जो भी जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उन्होंने उन्हें पूरी जिम्मेदारी से निभाया. हाईकोर्ट जज के रूप में करीब तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने 8788 मामलों का निपटारा किया. चीफ जस्टिस ने कहा कि उनके काम का आकलन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि उनके फैसलों की गुणवत्ता से किया जाना चाहिए.

अपने भाषण के अंत में जस्टिस सिंह ने कहा कि उन्होंने पूरे कार्यकाल में अपनी पत्नी इंदिरा की हर बात मानी है. अब रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए देहदान का उनका संकल्प भी पूरा करेंगे. उनकी इस बात पर पूरा कोर्टरूम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

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