Karva Chauth Saree and Ornament Distribution
Karva Chauth Saree and Ornament Distribution
करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. इस पर्व पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और नए कपड़े पहनकर पूजा करती हैं. लेकिन कई बार आर्थिक तंगी के कारण कुछ महिलाएं अपनी पसंद के कपड़े और श्रृंगार का सामान नहीं खरीद पातीं. ऐसी ही महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई में एक खास परंपरा निभाई जाती है. यहां ऐतिहासिक मां संकटा देवी मंदिर में हर साल करवा चौथ से पहले साड़ी और श्रृंगार की सामग्री बांटी जाती है.
कई सालों से निभाई जा रही है परंपरा
मां संकटा देवी मंदिर में साड़ी और श्रृंगार सामग्री बांटने की यह परंपरा पिछले कई वर्षों से चली आ रही है. मंदिर समिति के अनुसार, साल भर में स्थानीय और देश-विदेश से आने वाले भक्त माता रानी के दरबार में साड़ियां और दूसरे वस्त्र चढ़ाते हैं. मंदिर समिति इन सभी वस्त्रों को सुरक्षित रखती है. इसके बाद करवा चौथ से ठीक पहले इन्हें श्रृंगार की अन्य सामग्री के साथ वितरण के लिए तैयार किया जाता है.
4 से 5 हजार महिलाओं को मिलता है लाभ
करवा चौथ के पावन अवसर पर मंदिर में करीब 4,000 से 5,000 सुहागिन महिलाओं को साड़ी और श्रृंगार की सामग्री भेंट की जाती है. इस आयोजन में उरई शहर के साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचती हैं. खास बात यह है कि इस दौरान जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता.
त्योहार की खुशियां बांटना है उद्देश्य
इस आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति के पदाधिकारी, स्थानीय कार्यकर्ता और प्रशासन सहयोग करते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं की मदद करना है, जो आर्थिक तंगी के कारण त्योहार के लिए नए कपड़े या श्रृंगार का सामान नहीं खरीद पातीं. इस पहल से जरूरतमंद महिलाओं को त्योहार की खुशियों में शामिल होने का मौका मिलता है. साथ ही समाज में प्रेम, आपसी सहयोग और भाईचारे का संदेश भी पहुंचता है.
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