scorecardresearch

केवल खजूर की खेती से अपने लिए बनाया 20 लाख रुपए का मार्केट, जानें कैसे इस किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ पेश की कमाई की नई मिसाल

साल 2019 में गुजरात से ईरान मूल के खजूर के 181 पौधे खरीदे थे (लागत 4,000 रुपए का प्रति पौधा पड़ा था). उन्होंने 25x25 फीट की दूरी पर 3 एकड़ में इन्हें लगाया. आज चौथे साल में यह बाग उन्हें बंपर रिटर्न देने के लिए तैयार है.

खजूर की खेती खजूर की खेती

पारंपरिक खेती में लगातार बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और मौसम की अनिश्चितताओं से परेशान किसानों के लिए जालना जिले के एक किसान ने नई राह दिखाई है. घनसावंगी तहसील के तनवाडी गांव के किसान दामोदर शेंडगे ने महज तीन एकड़ जमीन में खजूर की बागवानी कर लाखों रुपये की कमाई का सफल मॉडल खड़ा किया है. वर्ष 2019 में लगाए गए खजूर के पौधे आज उन्हें भरपूर उत्पादन दे रहे हैं और इस वर्ष उन्हें करीब 20 लाख रुपये की आय होने की उम्मीद है.

वर्ष 2019 में शुरू की खजूर की बागवानी
जालना जिले के घनसावंगी तहसील के तनवाडी गांव के प्रगतिशील किसान दामोदर शेंडगे ने वर्ष 2019 में गुजरात से ईरान मूल के खजूर के 181 पौधे खरीदे थे. उस समय एक पौधे की कीमत परिवहन सहित करीब चार हजार रुपये पड़ी थी. उन्होंने तीन एकड़ क्षेत्र में 25 बाय 25 फीट की दूरी पर इन पौधों की रोपाई की. शुरुआती निवेश भले ही अधिक था, लेकिन आज यही बाग उनके लिए कमाई का बड़ा स्रोत बनने जा रहा है.

हर साल बढ़ता गया उत्पादन
यह खजूर बाग अब चौथे उत्पादन चक्र में प्रवेश कर चुका है. पहले वर्ष लगभग पांच टन, दूसरे वर्ष 10 से 11 टन और तीसरे वर्ष 16 से 17 टन उत्पादन प्राप्त हुआ था. इस वर्ष बेहतर गुणवत्ता के लिए फूलों और फलों की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई की गई है. इसके कारण उत्पादन भले ही 8 से 10 टन के बीच रहने की संभावना है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले फलों के कारण बाजार में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

कम लागत और कम मेहनत में बेहतर खेती
खजूर की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों की आवश्यकता बहुत कम होती है. दामोदर शेंडगे अपनी पूरी बाग को केवल जैविक गोबर खाद और ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से संभालते हैं. वर्षभर में इस बाग की देखरेख के लिए केवल 30 से 40 दिन का श्रम पर्याप्त होता है, जिससे मजदूरी का खर्च भी काफी कम हो जाता है.

अंतरवर्ती खेती से बढ़ रही अतिरिक्त आय
खजूर के पेड़ों के बीच खाली जगह का उपयोग करते हुए शेंडगे अंतरवर्ती खेती भी कर रहे हैं. उन्होंने इसी खेत में सोयाबीन और गेहूं की फसल ली. इस वर्ष लगभग 25 से 30 क्विंटल गेहूं और 20 से 25 क्विंटल सोयाबीन का उत्पादन प्राप्त हुआ है. इससे उन्हें अतिरिक्त आय मिल रही है और जमीन का अधिकतम उपयोग भी संभव हो रहा है.

सीधे ग्राहकों को बेचते हैं खजूर
शेंडगे बताते हैं कि उनके खजूर की गुणवत्ता और स्वाद के कारण व्यापारियों से लगातार मांग आती है. इसके बावजूद वे अपना पूरा उत्पादन सीधे ग्राहकों को बेचते हैं, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलती है. यदि इस वर्ष करीब 10 टन उत्पादन होता है और औसतन 200 रुपये प्रति किलो का भाव मिलता है, तो केवल तीन एकड़ क्षेत्र से लगभग 20 लाख रुपये की आय होने की संभावना है.

अन्य किसानों को भी दे रहे सलाह
किसान दामोदर शेंडगे का कहना है कि तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खजूर की फसल पर अन्य फसलों की तुलना में कम प्रभाव पड़ता है. कम लागत, कम श्रम, जैविक उत्पादन और अच्छा बाजार भाव मिलने के कारण यह खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो रही है. इसी वजह से वे अन्य किसानों को भी खजूर की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं.

किसानों के लिए प्रेरणा बना यह मॉडल
जालना जिले के तनवाडी गांव के किसान दामोदर शेंडगे का यह प्रयोग आज कई किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है. खेती में बढ़ती चुनौतियों के बीच कम खर्च और अधिक मुनाफा देने वाली वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने का यह सफल उदाहरण माना जा रहा है. यदि सही नियोजन और तकनीक के साथ खेती की जाए, तो किसान कम जमीन में भी लाखों रुपये की आय अर्जित कर सकते हैं.
(रिपोर्ट- गौरव साळी)

ये भी पढ़ें