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कच्छ के नलिया में आकार ले रहा है गुजरात का पहला 'सॉफ्ट रिलीज सेंटर', GIB रिवाइवल प्रोग्राम को मिलेगी नई उड़ान

वन विभाग अब गुजरात में पहला सॉफ्ट रिलीज सेंटर भी तैयार कर रहा है. यह केंद्र राजस्थान के जैसलमेर और रामदेवरा की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है. यहां उन चूजों को रखा जाएगा जिन्हें प्राकृतिक आवास से अंडों को सुरक्षित निकालकर वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाएगा.

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गुजरात के कच्छ से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है. विलुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे 'जम्प स्टार्ट प्रोजेक्ट' के तहत जन्मा दूसरा चूजा अपने जीवन के सबसे नाजुक शुरुआती 50 दिन सफलतापूर्वक पूरे कर चुका है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पहले प्रयास में जन्मा चूजा लापता हो गया था. उसके बाद वन विभाग ने मिली सीख के आधार पर कई अहम बदलाव किए, जिनका सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहा है.

पहले प्रयास से मिली सीख बनी सफलता की वजह
कच्छ के डीएफओ हर्ष ठक्कर ने बताया कि, पहले चूजे के अनुभव से कई महत्वपूर्ण सीख मिलीं. इसके बाद वन विभाग ने जल स्रोतों का बेहतर प्रबंधन किया, प्राकृतिक आवास में सुधार किया और आसपास मौजूद जंगली जानवरों से होने वाले खतरे को कम करने के लिए तेजी से काम किया. उन्होंने कहा कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का हर स्तर पर पूरा सहयोग मिला, जिससे जरूरी फैसले समय पर लिए जा सके. हर्ष ठक्कर के अनुसार, इन सभी प्रयासों का नतीजा है कि दूसरा चूजा अब 50 दिनों से अधिक समय से पूरी तरह स्वस्थ है और अपनी मां के साथ प्राकृतिक आवास में सुरक्षित जीवन बिता रहा है.

गुजरात में बनेगा पहला सॉफ्ट रिलीज सेंटर
वन विभाग अब गुजरात में पहला सॉफ्ट रिलीज सेंटर भी तैयार कर रहा है. यह केंद्र राजस्थान के जैसलमेर और रामदेवरा की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है. यहां उन चूजों को रखा जाएगा जिन्हें प्राकृतिक आवास से अंडों को सुरक्षित निकालकर वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाएगा. इससे गोडावण के पुनर्वास और संख्या बढ़ाने के अभियान को नई गति मिलने की उम्मीद है. इस उपलब्धि की केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने भी सराहना की है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता गुजरात में गोडावण के संरक्षण और प्रजाति के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और इस दुर्लभ पक्षी के भविष्य को नई उम्मीद देगी.

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