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किसान का करिश्मा... सूखे खेत में जैविक खेती के दम पर कमा रहे 8 लाख रुपए, 116 प्रकार के पेड़ों से आती है सालभर आमदनी

महाराष्ट्र के जालना जिले के किसान हनुमंतराव काळे ने सूखा प्रभावित क्षेत्र में जैविक और आधुनिक खेती से सफलता की मिसाल पेश की है. 2 एकड़ के केसर आम बाग से उन्होंने 8 लाख रुपये की आय अर्जित की। 116 प्रकार के पेड़ों, ड्रिप सिंचाई और बहुफसली मॉडल के जरिए वे अन्य किसानों को भी नई राह दिखा रहे हैं.

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महाराष्ट्र के जालना जिले के अंबड तहसील स्थित डोमेगांव गांव के एक किसान ने आधुनिक और जैविक खेती के दम पर सफलता की नई मिसाल पेश की है. सेवानिवृत्त कृषि अधिकारी और प्रगतिशील किसान हनुमंतराव अण्णासाहेब काळे ने केवल 2 एकड़ में लगाए गए केसर आम के बाग से इस वर्ष करीब 8 लाख रुपये की आय हासिल की है. सूखा प्रभावित क्षेत्र में उनकी यह सफलता अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है.

पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई नई राह
हनुमंतराव काळे ने करीब 10 वर्ष पहले अपनी 8 एकड़ जमीन में से 2 एकड़ क्षेत्र में केसर आम के 500 पौधे लगाए थे. समय के साथ यह बाग उनकी आय का प्रमुख स्रोत बन गया. इस वर्ष केवल आम की खेती से उन्हें लगभग 8 लाख रुपये का उत्पादन मिला, जबकि इसकी देखभाल पर करीब 1 से 1.5 लाख रुपये का खर्च आया. कम लागत में बेहतर आमदनी मिलने के कारण वे अन्य किसानों को भी फल बागवानी अपनाने की सलाह देते हैं.

जैविक खेती से बढ़ाई फलों की गुणवत्ता
हनुमंतराव पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं. उनके आम के बाग में किसी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या फर्टिलाइजर का उपयोग नहीं किया जाता. वे जैविक खाद, गांडूळ खाद और जैविक दवाओं के माध्यम से पौधों की देखभाल करते हैं. उनका मानना है कि जैविक खेती से फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में अच्छे दाम भी मिलते हैं.

116 प्रकार के पेड़ों से बनाया बहुफसली मॉडल
हनुमंतराव काळे ने अपनी 8 एकड़ जमीन पर 116 प्रकार के पेड़ लगाकर मिक्स क्रॉपिंग का सफल प्रयोग किया है. उनके खेत में आम के अलावा पेरू, मोसंबी, चिक्कू, संतरा, सीताफल, नींबू, नारियल, काजू, फणस, आंवला और जामुन जैसे कई फलदार पेड़ हैं. इससे उन्हें सालभर अलग-अलग फसलों से आय प्राप्त होती रहती है.

मसाला फसलों और सेब की भी खेती
फलों के साथ-साथ उन्होंने मसाला फसलों पर भी सफल प्रयोग किया है. खेत में तेजपत्ता, जायफल, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग और इलायची जैसे पौधे लगाए गए हैं. इन पौधों को उन्होंने कोकण कृषि विद्यापीठ, दापोली से मंगवाया था. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश से हार्मन-99 किस्म के करीब 70 सेब के पौधे भी लाकर लगाए हैं.

पानी की कमी के बीच तैयार की हरियाली
सूखा प्रभावित क्षेत्र में खेती को सफल बनाने के लिए हनुमंतराव ने अपनी जमीन पर करीब 1 करोड़ लीटर क्षमता वाला खेत तालाब बनाया है. इसी पानी के सहारे वे पूरे क्षेत्र में सिंचाई करते हैं. उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई है, जिससे पानी की बचत के साथ पौधों को जरूरत के अनुसार पानी मिलता है.

किसानों के लिए बने प्रेरणा
हनुमंतराव काळे की खेती में उनकी पत्नी रंजना काळे भी बराबरी से सहयोग करती हैं. उन्होंने खेत की देखभाल के लिए दो स्थायी मजदूर भी रखे हैं. उनका मानना है कि बदलते मौसम और अनियमित बारिश के दौर में किसानों को फल बागवानी, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ना चाहिए. आज डोमेगांव में उनका बहुफसली खेती मॉडल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है.
 

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