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हाथों में हथौड़ा, सागवान की लकड़ी और आंखों में सपने... चंद्रपुर की महिलाओं की ये कहानी बदल देगी आपकी सोच!

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में महिला सशक्तीकरण की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो आपको हैरान भी करेगी और प्रेरित भी. अब तक जिस काम को मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, उस कारपेंटरी के काम में चंद्रपुर की महिलाएं भी अपनी पहचान बना रही हैं.

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 Maharashtra's Chandrapur Women Break Stereotypes with Carpentry Skills Maharashtra's Chandrapur Women Break Stereotypes with Carpentry Skills

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में महिला सशक्तीकरण की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रेरणा देने वाली है. जिस कारपेंटरी के काम को अब तक मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, उसमें अब महिलाएं भी अपनी पहचान बना रही हैं. हाथों में आरी और हथौड़ा लेकर महिलाएं मजबूत सागवान की लकड़ी को नया आकार दे रही हैं.

यह पहल महाराष्ट्र वनविकास महामंडल यानी FDCM की ओर से शुरू की गई है. डिविजनल मैनेजर गणेश मोटकर की संकल्पना से चंद्रपुर के बल्लारशाह डिपो और गढ़चिरौली के अल्लापल्ली डिपो में महिलाओं को कारपेंटर का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

200 महिलाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
FDCM ने इस पहल के तहत करीब 200 महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है. बल्लारशाह वर्कशॉप में फिलहाल 30 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं, जबकि 15 महिलाएं अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुकी हैं. वहीं, अल्लापल्ली वर्कशॉप में करीब 30 महिलाएं प्रशिक्षण पूरा कर चुकी हैं. खास बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाएं अब दूसरी महिलाओं को भी कारपेंटर का हुनर सिखा रही हैं. इससे आत्मनिर्भरता की यह पहल एक महिला से दूसरी महिला तक पहुंच रही है.

सागवान की लकड़ी से तैयार हो रहा फर्नीचर
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को लकड़ी की पहचान से लेकर उसे काटने, घिसने, जोड़ने और अंतिम रूप देने तक की जानकारी दी जा रही है. इसके साथ ही आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. महिलाएं सागवान की लकड़ी से फर्नीचर के साथ-साथ मूर्तियां और दूसरी उपयोगी चीजें भी तैयार करना सीख रही हैं. चंद्रपुर और गढ़चिरोली का सागवान अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. इसी मजबूत और टिकाऊ लकड़ी से अब महिलाएं उच्च गुणवत्ता वाला फर्नीचर तैयार करने का हुनर सीख रही हैं.



प्रशिक्षण के बाद मिलने लगे ऑर्डर
इस पहल की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब विभाग को अलग-अलग जगहों से फर्नीचर तैयार करने के ऑर्डर भी मिलने लगे हैं. यानी महिलाओं को मिला प्रशिक्षण अब वास्तविक काम में भी इस्तेमाल हो रहा है. महिलाएं भी इस पहल से खुश हैं. उनका कहना है कि उन्हें एक नया हुनर सीखने और अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिल रहा है. चंद्रपुर की ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि हुनर किसी एक पेशे तक सीमित नहीं है. आरी और हथौड़े से लकड़ी को आकार देते ये हाथ अब अपने भविष्य को भी नई दिशा दे रहे हैं.

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