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बेटी हुई तो निकला भव्य वरघोड़ा, दूसरी पोती के जन्म पर दादा ने किया ऐसा जश्न कि बन गई मिसाल

समाज में आज भी कई जगह बेटी के जन्म पर मायूसी छा जाती है, लेकिन गुजरात के मेहसाणा से एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. यहां एक कारोबारी परिवार ने दूसरी बेटी के जन्म पर ऐसा जश्न मनाया जो पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन गया है.

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समाज में आज भी कई परिवार बेटी के जन्म पर मायूस हो जाते हैं और बेटे की चाह को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन गुजरात के मेहसाणा से सामने आई एक तस्वीर इस सोच को बदलने की उम्मीद जगाती है. यहां एक कारोबारी परिवार ने दूसरी बेटी के जन्म पर ऐसा भव्य जश्न मनाया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. बारोट परिवार ने पोती के जन्म की खुशी में वरघोड़ा निकाला और म्यूजिकल नाइट का आयोजन किया.

दूसरी बेटी के जन्म पर परिवार ने मनाया जश्न
मेहसाणा के कारोबारी सौरभ और अंकिता बारोट अपनी दूसरी बेटी आदिश्री के जन्म से बेहद खुश हैं. सौरभ के मुताबिक, बिजनेस परिवार होने के कारण कई लोग उनसे बेटे की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन परिवार ने साफ संदेश दिया कि आज के समय में बेटा और बेटी दोनों बराबर हैं. उन्होंने बेटी के जन्म को किसी खुशी से कम नहीं माना. अंकिता ने बताया कि समाज में अक्सर पहली बेटी के बाद बेटे की चाह की जाती है. हालांकि, उनके ससुराल वालों ने दूसरी बेटी के जन्म पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर इस सोच को बदलने की कोशिश की. अंकिता अपनी दोनों बेटियों प्राशी और आदिश्री को अपनी जिंदगी की सबसे अच्छी सहेलियां मानती हैं.

दादा ने पोती के लिए निकाला वरघोड़ा
केमिकल कारोबार से जुड़े दादा अनिल बारोट ने अपनी पोती के जन्म को यादगार बनाने के लिए भव्य उत्सव का आयोजन किया. परिवार ने वरघोड़ा निकाला और म्यूजिकल नाइट के साथ खुशियां मनाईं. इसके अलावा मेहमानों के लिए बड़े भोज का भी आयोजन किया गया. परिवार का कहना है कि समाज में अक्सर बेटी के जन्म पर जलेबी और बेटे के जन्म पर पेड़े बांटने जैसी सोच देखने को मिलती है. बारोट परिवार ने इस परंपरागत सोच से अलग हटकर बेटी के जन्म पर शानदार आयोजन किया.

बेटियों को पढ़ाकर आगे बढ़ाने का संकल्प
बारोट परिवार का कहना है कि वे अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा देकर आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना चाहते हैं. उनका यह कदम महिला सशक्तिकरण की सोच को मजबूत करने वाला संदेश देता है. परिवार ने साबित किया कि बेटी का जन्म चिंता नहीं, बल्कि गर्व और उत्सव का अवसर हो सकता है. मेहसाणा के बारोट परिवार की यह पहल उन लोगों के लिए मिसाल है, जो आज भी बेटा और बेटी में फर्क करते हैं. दूसरी बेटी के जन्म पर भव्य जश्न मनाकर परिवार ने संदेश दिया कि बेटियां भी परिवार की शान हैं और उन्हें बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए.

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