इंडिया गेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इंडिया गेट (प्रतीकात्मक तस्वीर) दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक सिटी बनाने की तैयारी चल रही है. डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन ने मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक सिटी के लिए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया है. डीडीसी के इस ब्लूप्रिंट में एक वर्ल्ड क्लास इलेक्ट्रॉनिक शहर विकसित करने के लिए सिफारिशें की गई हैं. ये इलेक्ट्रॉनिक सिटी दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बापरोला में स्थापित की जाएगी. इसमें दिल्ली को भारत और विश्व स्तर पर शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन, मेन्यूफेक्चरिंग व रिफर्बिशमेंट कंपनियों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए एक दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन, मेन्यूफेक्चरिंग व रेफर्बिशमेंट (ESDMR) पॉलिसी 2022-27 का प्रस्ताव दिया गया है.
क्या है इस पॉलिसी का उद्देश्य?
दरअसल, इस पॉलिसी का उद्देश्य विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के लिए एक बुनियादी ढांचा बनाना है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए दिल्ली को एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करना है. डीडीसी ने सिफारिश की है कि दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक सिटी के लिए सभी बुनियादी ढांचे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अनुरूप विकसित किए जाने चाहिए. इसके लिए दिल्ली सरकार ने एक रियल एस्टेट डेवलपर के साथ भागीदारी की है.
बता दें, अर्बन एक्स्टेंशन रोडवे-II के पूरा होने के साथ, बापरोला में बनने वाला दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक सिटी, इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के साथ-साथ प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों जैसे NH-1, NH-10, NH-8 और NH-2 से लगभग 20 मिनट की दूरी पर होगा.
क्या की गई हैं सिफारिशें?
नीति में डीडीसी ने सिफारिश की है कि दिल्ली में एक इलेक्ट्रॉनिक रिसर्च व डिज़ाइन फैसिलिटी भी स्थापित की जाए. ताकि ग्लोबल इंडिपेंडेंट डिजाइन हाउस, प्रासंगिक स्टार्ट-अप और प्रोडक्ट डिजाइन में बदलाव करने वाले मूल डिजाइन निर्माताओं को साथ लाया जा सके. 'इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन विलेज' की परिकल्पना दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक सिटी के साथ तालमेल में काम करने के रूप में की गई है. इसका उद्देश्य है कि दिल्ली में रिसर्च और डिजाइन, निर्माण और नवीनीकरण से लेकर मरम्मत-बिक्री के बाद की सेवाओं तक एक संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन स्थापित की जा सके.
हालांकि, इस दौरान बैठक में मौजूदा समय में निवेशकों के दिल्ली तक न आने के पीछे के कारणों पर भी बात की. जिसमें कई कारण बताए गए-
1. शॉर्ट सेटअप टाइम- यह एक 'प्लग एंड प्ले' मॉडल में रेडी टू बिल्ड फैक्ट्रीज के साथ कमर्शियल प्रोडक्शन को जल्द से जल्द शुरू करने में सक्षम बनाता है.
2. कम लीज रेंटल- एनसीआर के भीतर अन्य लोकेशन विकल्पों के साथ किफायती रेंट
3. उत्पादन की कम लागत- अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए लेबर कॉस्ट, ऑपरेटिंग कॉस्ट का एक जरूरी प्रोपोरशन है. विशेष रूप से महिलाओं के बीच रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए श्रम लागत में सब्सिडी देना ज्यादा पसंद किया जाता है
4. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस- लालफीताशाही और अनावश्यक नौकरशाही को खत्म करना, जो एक मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन की स्थापना और संचालन दोनों से जुड़ा है.
5. नीति स्थिरता- नीति की अवधि के दौरान नीति दिशा या प्रोत्साहन में कोई बदलाव न करना.