kota wrestler ravindra sharma
kota wrestler ravindra sharma
कुश्ती की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल खिलाड़ी बनकर नहीं, बल्कि खेल के हर पहलू में अपनी पहचान छोड़ते हैं. राजस्थान के कोटा शहर के रविंद्र शर्मा ऐसा ही एक नाम हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने से लेकर 12 बार राष्ट्रीय चैंपियन बनने, एशियन गेम्स ट्रायल में रेफरी की जिम्मेदारी निभाने, बॉलीवुड की चर्चित फिल्म दंगल का हिस्सा बनने और अभिनेता आमिर खान को कुश्ती की तकनीकी बारीकियां सिखाने तक उनका सफर किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है.
हाल ही में नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स ट्रायल में रविंद्र शर्मा ने रेफरी की भूमिका निभाई. इस दौरान वे भारत की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट और हरियाणा की मीनाक्षी के बीच हुए महत्वपूर्ण मुकाबले में निर्णायक भी रहे. कोटा से इस स्तर पर रेफरी की भूमिका निभाने वाले वे पहले व्यक्ति माने जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय रेफरी के रूप में उनकी पहचान पहले से स्थापित है और वे कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में यह जिम्मेदारी निभा चुके हैं.
जब दंगल के लिए आया फोन
रविंद्र शर्मा का नाम केवल कुश्ती के अखाड़े तक सीमित नहीं रहा. भारतीय महिला पहलवानों के संघर्ष और सफलता पर बनी सुपरहिट फिल्म दंगल में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें विशेष रूप से बुलाया गया था क्योंकि वे स्वयं अंतरराष्ट्रीय रेफरी हैं.
रविंद्र बताते हैं कि दंगल की शूटिंग शुरू होने पर उन्हें फोन आया और पंजाब के लुधियाना स्थित गुज्जरवाल गांव में कई दिनों तक शूटिंग कराई गई. इसके बाद मुंबई में भी फिल्मांकन हुआ. फिल्म में उन्होंने रेफरी की भूमिका निभाई, जिससे कुश्ती मुकाबलों के दृश्य वास्तविक और तकनीकी रूप से सटीक बन सके. पर्दे पर दिखाई देने वाले कई मुकाबलों में उनकी मौजूदगी ने फिल्म को असली कुश्ती प्रतियोगिता जैसा स्वरूप देने में अहम योगदान दिया.
आमिर खान को भी सिखाए कुश्ती के दांव-पेंच
दंगल फिल्म में पहलवान की भूमिका निभाने के लिए अभिनेता आमिर खान को कुश्ती की बारीकियों को समझना था. उस समय अर्जुन पुरस्कार विजेता कृपाशंकर साईं भारतीय कुश्ती टीम को प्रशिक्षण देने में व्यस्त थे. ऐसे में आमिर खान ने कुश्ती की तकनीकी जानकारी और मुकाबलों की वास्तविक समझ हासिल करने के लिए कोटा के रविंद्र शर्मा से संपर्क किया.
रविंद्र शर्मा मुंबई पहुंचे और उन्होंने आमिर खान को कुश्ती के दांव-पेंच, तकनीकी नियमों तथा मुकाबलों की बारीकियों की जानकारी दी. एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान और रेफरी होने के कारण उनकी सलाह फिल्म निर्माण टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई. यही वजह रही कि दंगल में दिखाए गए कुश्ती मुकाबलों को दर्शकों और खेल विशेषज्ञों ने काफी सराहा.
उपलब्धियों से भरा रहा खेल जीवन
रविंद्र शर्मा का खेल करियर शानदार उपलब्धियों से भरा रहा है. वर्ष 2004 में पाकिस्तान में आयोजित साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता. वर्ष 2000 की एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन पदक जीतने वाले रविंद्र राष्ट्रीय स्तर पर 12 बार चैंपियन रहे हैं. उन्होंने ऑल इंडिया रेलवे चैंपियनशिप में छह स्वर्ण पदक जीतकर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राजस्थान सरकार ने उन्हें प्रदेश के प्रतिष्ठित महाराणा प्रताप अवार्ड से सम्मानित किया है.
नौकरी के साथ निभा रहे खेल गुरु की भूमिका
वर्तमान में भारतीय रेलवे में चीफ टिकट इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत रविंद्र शर्मा आज भी कुश्ती से पूरी तरह जुड़े हुए हैं. प्रतियोगिताओं में रेफरी की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ वे युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार कर रहे हैं. कोटा सहित राजस्थान और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले युवा पहलवान उनके अनुभव का लाभ ले रहे हैं. रविंद्र का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष और व्यक्तित्व निर्माण का रास्ता भी है. यही कारण है कि वे लगातार नई पीढ़ी को कुश्ती के प्रति प्रेरित कर रहे हैं और उन्हें अखाड़े से लेकर बड़े मंच तक पहुंचने का मार्ग दिखा रहे हैं.
खिलाड़ी, रेफरी, गुरु और फिल्मी पर्दे का चेहरा
बहुत कम खिलाड़ियों को ऐसा अवसर मिलता है कि वे खेल के मैदान में चैंपियन बनें, अंतरराष्ट्रीय रेफरी के रूप में पहचान हासिल करें, देश की सबसे चर्चित खेल फिल्म का हिस्सा बनें और उसी फिल्म के नायक को कुश्ती की तकनीक भी सिखाएं. रविंद्र शर्मा ने यह सभी मुकाम हासिल किए हैं.
विनेश फोगाट जैसे बड़े मुकाबले में निर्णायक की भूमिका निभाने से लेकर दंगल में रेफरी बनने और आमिर खान को कुश्ती की बारीकियां सिखाने तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा, मेहनत और समर्पण व्यक्ति को कितनी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है. कोटा का यह पहलवान आज देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है.
रिपोर्टर: चेतन गुर्जर
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