
Birth of Sahiwal Breed Cows Calf Through IVF Technology
Birth of Sahiwal Breed Cows Calf Through IVF Technology
पूर्वी भारत मे पहली बार IVF तकनीक से साहीवाल नस्ल की बछिया पैदा करके डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. इस तकनीक से पशुपालक किसानों काफी लाभ मिलेगा. दुग्ध उत्पादन की क्षमता भी बढ़ेगी. यह भारत की दुग्ध उत्पादन रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, जहां अब जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील विदेशी नस्लों की जगह उच्च उत्पादकता वाली स्वदेशी नस्लों पर जोर दिया जा रहा है.

बेहतर नस्ल के बछड़े-बछिया पैदा करने में सक्षम
यह तकनीक सामान्य गायों को सरोगेट मां बनाकर साल में कई बेहतर नस्ल के बछड़े-बछिया पैदा करने में सक्षम है. बता दें कि पूसा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आईवीएफ (IVF) तकनीक से तीन बछिया का जन्म पिपराकोठी देसी नस्ल संवर्धन के उत्कृष्टता केंद्र में कराया है. चौथा बछिया मोतिहारी के चकिया गौशाला में जन्म कराया गया है. इस तकनीक से देसी नस्लों के विकास में अभूतपूर्व तेजी आएगी. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने बताया कि पिछले कुछ दशकों से दुध उत्पादन के लिए किसान विदेशी नस्लों पर ही निर्भर हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से विदेशी नस्लों की गाय में कई समस्या आ रही है.
किसानों को एक 'क्लाइमेट-स्मार्ट' गाय देने का प्रयास
होलस्टीन फ्रेसियन (HF) और जर्सी नस्लें भारत में अधिक बीमार होती हैं. और उनके गर्भधारण में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. देसी नस्ल भारत के जलवायु के अनुकूल है और उनमें विदेशी नस्लों के बराबर दूध देने की क्षमता है. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने मोबाइल पर बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण विदेशी नस्लें भारत में अब ज्यादा लाभकारी नहीं रह गई हैं. उन्होंने कहा कि OPU-IVF तकनीक से विश्वविद्यालय किसानों को एक 'क्लाइमेट-स्मार्ट' गाय देने का प्रयास कर रहा है. इस तकनीक से न सिर्फ किसानों को ज्यादा दूध उत्पादन मिल सकेगा बल्कि गाय गर्मी सहन कर सकेंगी और कम बीमार पड़ेंगी. उन्होंने कहा कि देसी नस्लों के गाय के दूध की गुणवत्ता भी काफी बेहतर है और वे A2 दूध देती है, जो पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर है.

A2 दूध पाचन में आसान और पौष्टिक
डेयरी वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि A2 दूध के अनेक लाभ हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी नस्लें A1 दूध देती हैं, जो पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है. A2 दूध पाचन में आसान और पौष्टिक है. उन्होंने कहा कि A2 दूध में प्रोलाइन अमीनो एसिड होता है, जो BCM-7 पेप्टाइड के निर्माण को रोकता है. A1 दूध की तुलना में A2 कैल्शियम, विटामिन D और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होता है. इसमें सेरेब्रोसाइड्स होते हैं, जो मस्तिष्क विकास और प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं. डेयरी वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण मोहन कुमार ने बताया कि आईवीएफ तकनीक किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी है. इस तकनीक से एक पीढ़ी में ही पूरी तरह से उच्च गुणवत्ता वाली साहीवाल नस्ल का उत्पादन हो सकता है और उसकी मां फ्रीजियन या जर्सी कोई भी हो बच्चे में शुद्ध साहीवाल नस्ल के सारे जेनेटिक गुण होते हैं. इस परियोजना में डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. कृष्ण मोहन कुमार और डॉ. आरके अस्थाना की टीम ने काम किया. विश्वविद्यालय अब इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाने का प्रयास करेगा, जिससे बिहार के दुग्ध उद्योग में एक नई क्रांति आने की संभावना है.