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श्रावस्ती का बदलता चेहरा, बुद्ध की धरती पर विकास की उड़ान, अब शांति के साथ जुड़ रहे हैं नए अवसर

कुछ साल पहले तक श्रावस्ती सिर्फ तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब यह देश और दुनिया से सीधे जुड़ने लगा है. 1351 मीटर लंबे रनवे वाला एयरपोर्ट पूरी तरह चालू हो चुका है. इससे बौद्ध सर्किट को नई पहचान मिली है. गांव के निवासी बताते हैं कि पहले यहां सन्नाटा रहता था, लेकिन अब आसमान में उड़ते जहाज इस बदलाव के गवाह हैं.

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श्रावस्ती, यह सिर्फ एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बदलते भारत की एक जीती-जागती तस्वीर बन चुका है. जहां कभी भगवान बुद्ध ने ठहरकर शांति का संदेश दिया था, वहीं आज यह जिला विकास की नई उड़ान भर रहा है. यहां की सुबहें आज भी सुकून भरी हैं, लेकिन अब इस शांति के साथ आधुनिक सुविधाओं की रफ्तार भी जुड़ गई है.

कुछ साल पहले तक श्रावस्ती सिर्फ तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब यह देश और दुनिया से सीधे जुड़ने लगा है. 1351 मीटर लंबे रनवे वाला एयरपोर्ट पूरी तरह चालू हो चुका है. इससे बौद्ध सर्किट को नई पहचान मिली है. गांव के निवासी बताते हैं कि पहले यहां सन्नाटा रहता था, लेकिन अब आसमान में उड़ते जहाज इस बदलाव के गवाह हैं.

हर घर तक पहुंचा साफ पानी
एक समय था जब यहां पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी. लोगों का काफी समय पानी लाने में ही बीत जाता था. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. हर घर नल योजना के तहत 193 ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं, जिससे करीब 1.82 लाख घरों तक साफ पेयजल पहुंच रहा है. अब महिलाओं को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता और उन्हें परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिल रहा है.

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार
श्रावस्ती में स्वास्थ्य सेवाएं भी तेजी से बेहतर हो रही हैं. पहले गंभीर बीमारियों के लिए लोगों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब यहां अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज बन रहा है. इसके शुरू होने के बाद लोगों को मल्टीस्पेशलिटी सुविधाएं यहीं मिल सकेंगी और इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो जाएगी.

बेहतर सड़कें और कनेक्टिविटी
सरकार ने यहां सड़क और ड्रेनेज व्यवस्था को भी मजबूत किया है. पहले बारिश के मौसम में यात्रा करना मुश्किल होता था, लेकिन अब बेहतर सड़कों की वजह से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को काफी राहत मिली है. इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है.

रोजगार के नए अवसर
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ रोजगार पर भी ध्यान दिया गया है. श्रावस्ती के जंगल अब सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि रोजगार का स्रोत बन गए हैं. यहां सागौन और शीशम की लकड़ी से बने फर्नीचर और हस्तशिल्प देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रहे हैं. करीब 300 से अधिक MSME यूनिट्स यहां संचालित हो रही हैं. ODOP योजना के तहत स्थानीय कारीगरों को नई पहचान मिली है. खासकर महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है.

युवाओं के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां 2 पॉलीटेक्निक और 3 ITI केंद्र स्थापित किए गए हैं. आधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि युवा नौकरी खोजने के बजाय नौकरी देने वाले बन सकें.
 

रिपोर्टर: पंकज वर्मा

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