लक्ष्मी भंडार योजना
लक्ष्मी भंडार योजना
2026 विधानसभा चुनाव से पहले ममता सरकार ने फिर से वही दांव चला है, जो उन्होंने 2021 चुनाव से पहले चला था. आज के अंतरिम बजट में लक्ष्मी भंडार की धनराशि हर महीने 500 रुपए बढ़ा दी गई है. ऐसे में अब जनरल कैटेगरी की महिलाओं को मिलेगा 1500 रुपये हर महीने और एससी एसटी महिलाओं को मिलेगा 1700 रुपये प्रति महीने. फिलहाल राज्य में कुल 2 करोड़ 42 लाख महिलाओं को लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ मिल रहा है. ऐसे में इसी महीने से महिलाओं को बढ़ी हुई धन राशि मिलनी शुरू हो जाएगी. स्वाभाविक रूप से महिलाओं में इस घोषणा के बाद खुशी दिखायी दे रही है.
महिलाओं ने मनाई खुशी
आसनसोल की कविता तपादार ने तो इस खुशी में होली भी खेल ली. उन्होंने इस खुशी में कहा "हमें बहुत खुशी और गर्व है कि दीदी ने हम जैसी हाउसवाइफ और महिलाओं के बारे में सोचा और फाइनेंशियल मदद बढ़ाई है. यह सपोर्ट कई परिवारों के लिए बहुत मायने रखता है. कुछ लोग कहते हैं कि हर महीने भत्ता देने के बजाय नौकरी या बिजनेस के मौके देना बेहतर होता, लेकिन हम इस पहल का समर्थन करते हैं. इतनी बड़ी आबादी में सरकार के लिए हर किसी को नौकरी देना मुमकिन नहीं है."
राज्य के कई हिस्सों में महिलाओं ने लक्ष्मी भंडार की राशि में बढ़ोतरी के लिए खुशी जतायी है. हालांकि इससे राज्य सरकार के कोष पर भारी दबाव पड़ने वाला है. सिर्फ यही नहीं बेरोजगार युवाओं के लिए भी सरकार ने नई योजना 'बांग्लार युवा साथी” के तहत 21 से 40 साल तक के बेरोजगार युवाओं के लिए 1500 रुपये हर महीने देने की घोषणा भी की है.
राज्य कर्मचारी की भी हुई शिकायत दूर
ममता बनर्जी ने इस अंतरिम बजट के जरिए पिछले कई महीनों से आंगनवाड़ी और आई सी डी एस कर्मियों में पनप रहे गुस्से को शांत करने की कोशिश भी की है. इनके लिए महीना हर महीने मिलने वाले रुपए बढ़ा दिए गए हैं. ऐसे में अगर देखा जाए तो इस बार के अंतरिम बजट में महिलाओं और युवाओं को साधने के साथ-साथ, राज्य सरकार ने कर्मचारियों में पनप रहे गुस्से को शांत करने की कोशिश भी की है.
पिछले चुनाव में भी अपनाया था सेम फॉर्मुला
माना जाता है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की भारी सफलता के पीछे लक्ष्मी भंडार योजना ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और महिलाओं का भरपूर वोट टीएमसी को मिला. अगस्त 2021 से जब राज्य में लक्ष्मी भंडार योजना शुरू हुआ तो जगह-जगह महिलाओं की कतारें अपना नाम डलवाने के लिए नजर आई, और बंगाल में महिला वोटर जो लगभग पचास प्रतिशत के बराबर हैं, उनकी भागीदारी चुनाव के वक्त काफी अहम मानी जाती है.
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