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Acchi Baat: 'संसार में तो रहो पर संसार के मत रहो', Pandit Dhirendra Krishna Shastri ने ऐसा क्यों कहा?

Acchi Baat Dhirendra Shastri Ke Saath | मध्य प्रदेश के करेरा में आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जीवन में भक्ति और शांति के महत्व पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा, 'यदि आप परमात्मा को देखना चाहते हैं तो भक्ति की आंख चाहिए.' उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि जैसे जल के बिना नदी अधूरी है, वैसे ही भक्ति के बिना मनुष्य अधूरा है. संसार के साधनों से केवल सुख मिल सकता है, लेकिन वास्तविक शांति प्रभु की कथा और भजन से ही मिलती है. नाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक नाव जल में रहती है तब तक तैरती है, लेकिन जल नाव में आते ही वह डूब जाती है; इसी तरह मनुष्य को संसार में रहना चाहिए लेकिन संसार को अपने भीतर नहीं भरने देना चाहिए. उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई 'उमा कहौं मैं अनुभव अपना' का उल्लेख करते हुए संपूर्ण जगत को स्वप्न के समान और केवल प्रभु भजन को सत्य बताया. साथ ही दूसरों से तुलना न कर संतुष्ट रहने का संदेश दिया.