Acchi Baat | कथावाचक ने प्रवचन के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और कंस के अत्याचारों से जुड़ी कथा का विस्तार से वर्णन किया. उन्होंने कहा कि व्यक्ति का अपराध करने पर वह स्वयं लड़ता है, परंतु संत का अपराध करने पर उनकी रक्षा स्वयं परमात्मा करते हैं. प्रसंग के अनुसार, आकाशवाणी सुनकर कंस ने देवकी के छह संतानों का वध किया और सातवें गर्भ को संकर्षण क्रिया द्वारा रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया गया. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मध्यरात्रि कारागृह में भगवान श्रीहरि का चतुर्भुज रूप में प्राकट्य हुआ. देवकी के निवेदन पर प्रभु ने नवजात शिशु का रूप धारण किया. इसके बाद वसुदेव जी बालक कृष्ण को सूप में रखकर उफनती यमुना पार कर गोकुल पहुंचे, जहां प्रभु के चरण स्पर्श से यमुना शांत हुईं. अंत में गोकुल में लाला के जन्म पर सुनंदा बुआ और नंद बाबा के हर्षोल्लास तथा बधाई प्रसंग का वर्णन किया गया.