scorecardresearch

कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव! अब AI बताएगा मरीज पर दवा असर करेगी या नहीं

NHS ने एक दवा bevacizumab को मंजूरी दी है, जो कैंसर की ग्रोथ को धीमा करने का काम करती है. लेकिन यह दवा सभी मरीजों पर असर नहीं करती और केवल कुछ ही लोगों को इसका फायदा मिलता है.

Cancer Treatment (Representational Image) Cancer Treatment (Representational Image)
हाइलाइट्स
  • अब पता चलेगा किस कैंसर मरीज पर दवा करेगी असर

  • मरीजों को पर्सनलाइज्ड इलाज देने में मदद कर सकती है ये तकनीक

वैज्ञानिकों ने एक नया AI-बेस्ड तरीका खोजा है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि एडवांस्ड आंत के कैंसर के मरीज पर कौन सी दवा असर करेगी और कौन सी नहीं. इसका मकसद है मरीजों को बेकार इलाज और उसके साइड इफेक्ट्स से बचाना.

यूके में हर साल करीब 10,000 लोग एडवांस्ड बाउल कैंसर से पीड़ित
यूके में हर साल करीब 10,000 लोग एडवांस्ड बाउल कैंसर से पीड़ित पाए जाते हैं. इस स्टेज पर बीमारी का इलाज मुश्किल हो जाता है और मरीजों के बचने की संभावना काफी कम हो जाती है. शुरुआती अवस्था में जहां इलाज से ठीक होने की संभावना 98% तक होती है, वहीं एडवांस्ड स्टेज में पांच साल तक जीवित रहने की संभावना लगभग 10% रह जाती है.

सभी मरीजों पर असर नहीं करती दवा
हाल ही में NHS ने एक दवा bevacizumab को मंजूरी दी है, जो कैंसर की ग्रोथ को धीमा करने का काम करती है. लेकिन यह दवा सभी मरीजों पर असर नहीं करती और केवल कुछ ही लोगों को इसका फायदा मिलता है. इसके अलावा, इस दवा के गंभीर साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, जैसे खून के थक्के बनना और पेट व आंतों से जुड़ी समस्याएं.

AI कैसे मदद करेगा?
इसी समस्या को हल करने के लिए लंदन के Institute of Cancer Research और डबलिन की RCSI University के वैज्ञानिकों ने PhenMap नाम का AI टूल बनाया है. यह टूल ट्यूमर के जेनेटिक डेटा को समझकर यह पहचानने में मदद करता है कि कौन से मरीज इस दवा से फायदा नहीं पाएंगे.

कैसे की गई रिसर्च
शोध में 117 यूरोपीय मरीजों के डेटा का अध्ययन किया गया, जिन्हें कीमोथेरेपी और bevacizumab दी गई थी. AI ने जटिल डेटा का विश्लेषण करके ऐसे पैटर्न खोजे, जिन्हें सामान्य तरीके से पहचानना मुश्किल होता है. इससे यह समझने में मदद मिली कि किन मरीजों को इस दवा से लाभ नहीं मिल रहा था.

मरीजों को पर्सनलाइज्ड इलाज देने में मदद कर सकती है ये तकनीक
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक आगे चलकर मरीजों को पर्सनलाइज्ड इलाज देने में मदद कर सकती है, जिससे हर मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार सही दवा मिल सकेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस तकनीक को बड़े स्तर पर और ज्यादा मरीजों पर परीक्षण की जरूरत है, तभी इसे क्लिनिकल उपयोग में लाया जा सकेगा.

ये भी पढ़ें: