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एम्स में एक महीने के शिशु का हुआ सफल ऑपरेशन, जन्म से ही इस बीमारी से था ग्रसित, इलाज ना मिलने पर जा सकती थी जान

डॉक्टरों के मुताबिक, बाहर निकले मस्तिष्क ऊतक के कारण इंट्राक्रेनियल संरचनाओं पर लगातार दबाव और खिंचाव बना रहता है. इससे मस्तिष्क का सामान्य विकास बाधित हो सकता है. ऐसे मामलों में समय पर सर्जिकल हस्तक्षेप ही सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है.

Rare Brain Condition Surgery Rare Brain Condition Surgery
हाइलाइट्स
  • समय पर सर्जरी क्यों है जरूरी?

  • एनेस्थीसिया और ऑपरेशन की अहम भूमिका

गोरखपुर स्थित एम्स में एक बेहद दुर्लभ केस का सफल इलाज कर डॉक्टरों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यहां एक महीने के शिशु में पाई गई गंभीर जन्मजात बीमारी जायंट ऑक्सिपिटल एन्सेफेलोसील का सफल ऑपरेशन किया गया, जिससे बच्चे को नई जिंदगी मिली है.

 

 

क्या है यह खतरनाक बीमारी?
यह एक दुर्लभ जन्मजात विकृति होती है, जिसमें मस्तिष्क के कुछ हिस्से और मेनिंजीज (मस्तिष्क की झिल्ली) खोपड़ी में बने एक छेद के जरिए बाहर निकल आते हैं. ऐसी स्थिति में जन्म के तुरंत बाद सर्जरी बेहद जरूरी होती है, क्योंकि देरी होने पर बच्चे में हाइड्रोसेफेलस जैसी गंभीर समस्या हो सकती है, जो दिमाग के विकास को प्रभावित कर जीवन के लिए खतरा बन सकती है.

समय पर सर्जरी क्यों है जरूरी?
डॉक्टरों के मुताबिक, बाहर निकले मस्तिष्क ऊतक के कारण इंट्राक्रेनियल संरचनाओं पर लगातार दबाव और खिंचाव बना रहता है. इससे मस्तिष्क का सामान्य विकास बाधित हो सकता है. ऐसे मामलों में समय पर सर्जिकल हस्तक्षेप ही सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है.

अनुभवी टीम ने संभाली जिम्मेदारी
इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व न्यूरोसर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निनाद आनंद सावंत ने किया, जिन्हें पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त है. सर्जरी के दौरान डॉ. सार्थक मेहता और डॉ. देवेंद्र कुमार ने सहयोग किया. वहीं, विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज कनौजिया के मार्गदर्शन में पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया.

एनेस्थीसिया और ऑपरेशन की अहम भूमिका
इस तरह की सर्जरी में एनेस्थीसिया प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है. प्रो. संतोष शर्मा और डॉ. गणेश ने इस जिम्मेदारी को कुशलता से निभाया, जिससे ऑपरेशन सुरक्षित और सफल हो सका. ऑपरेशन के बाद की देखभाल भी इस सफलता का अहम हिस्सा रही. डीन प्रो. महिमा मित्तल के नेतृत्व में टीम ने पीआईसीयू में बच्चे के लिए विशेष व्यवस्था की. डॉ. ममता गुप्ता और अन्य डॉक्टरों ने मिलकर क्रिटिकल केयर सुनिश्चित की, वहीं नर्सिंग स्टाफ ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.

संस्थान नेतृत्व का मिला सहयोग
संस्थान ने इस उपलब्धि के लिए निदेशक प्रो. विभा दत्ता के निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन का आभार जताया. उनके नेतृत्व में एम्स गोरखपुर में उन्नत चिकित्सा सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है.

रिपोर्ट- रवि गुप्ता

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