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वैक्सीनेशन में अहम भूमिका निभा रहीं ANM अनीता, छह माह के बच्चे के साथ दुर्गम इलाके में करती हैं ड्यूटी

जैसलमेर के हेल्थ कर्मियों (ANM) ने कोरोना को रोकने के लिए वैक्सीनेशन प्रक्रिया अहम भूमिका निभाकर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है. कई मुश्किलें व कठिन हालातों के बावजूद इन रेगिस्तानी इलाकों में ऊंट और ट्रैक्टरों पर इन स्वास्थ्य कर्मियों ने डोर टू डोर जाकर वैक्सीनेशन किया.

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Vaccination drive in jaisalmer by ANM Vaccination drive in jaisalmer by ANM
हाइलाइट्स
  • 6 महीने के बच्चे को साथ लेकर काम करती हैं अनीता

  • ऊंट की मदद से किया जा रहा टीकाकरण

जैसलमेर के विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले दुर्गम इलाकों में तैनात कई हेल्थ कर्मियों (ANM) ने कोरोना को रोकने के लिए वैक्सीनेशन प्रक्रिया में जो भूमिका निभाई है उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है. कई मुश्किलें व कठिन हालातों के बावजूद इन रेगिस्तानी इलाकों में ऊंट और ट्रैक्टरों पर इन स्वास्थ्य कर्मियों ने डोर टू डोर जाकर वैक्सीनेशन किया.आज इन दूरदराज के रेगिस्तानी इलाकों में वैक्सीनेशन 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है.

ऊंट की मदद से किया जा रहा टीकाकरण
एक तरफ जहां भारत 100 करोड़ टीकाकरण का निर्धारित लक्ष्य पार कर चुका है. ऐसे में इसके दूर दराज स्थित दुर्गम इलाके भी पीछे नहीं हैं. चारों तरफ से बंजर रेत और शुष्क थार रेगिस्तान से घिरा जैसलमेर कोरोना रोधी टीकाकरण अभियान में कदमताल मिला रहा है. कोरोना से जंग जीतने में थार के दुर्गम रेगिस्तान में बसे जैसलमेर जिले में जिला कलेक्टर आशीष मोदी के दिशानिर्देशन में चिकित्सा विभाग की पहल रंग ला रही है.

आज जैसलमेर वैक्सीनेशन की गिनती में काफी ऊंचे पायदान पर है. इसमें सबसे बड़ी भूमिका इन दुर्गम रेगिस्तानी इलाकों में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों व ए.एन.एम की मानी जा रही है. जैसलमेर के सबसे कठिन रेगिस्तानी इलाके करड़ा, पोछीना में तैनात ए.एन.एम अनीता और रेणू ने ऊंट से लोगों के घर घर जाकर अपने काम को बखूबी अंजाम दिया. 

6 महीने के बच्चे को साथ लेकर काम करती हैं अनीता
इस वैक्सीनेशन के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में सफल बनाने में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. ए.एन.एम में काम करनी वाली अनीता का बच्चा मात्र 6 से 8 महीने का है और उसे ड्यूटी में साथ लाना उनकी मजबूरी है. छोटे बच्चे को लिए अनीता अपना काम भी करती हैं और उसे फीडिंग भी करवाती हैं.

वहीं रेणू की बात करें तो वह डायबिटिक होने के बावजूद भी करड़ा क्षेत्र की ढ़ाणियों (मुख्य गांव से दूर स्थित झोपड़े) में 95 प्रतिशत वैक्सीनेशन के कार्य को अंजाम दे चुकी हैं. इन ए.एन.एम व स्वास्थ्य कर्मियों को रेगिस्तान में बनी इन ढाणियों में पहुंचने के लिये पैदल सफर तय करना पड़ता है, जबकि कई जगहों पर ऊंटों के जरिए जाया जाता है. 

घर-घर जाकर सफल बनाया अभियान
सी.एम.एच.ओ डॉ. कुनाल साहू ने कहा, "जैसलमेर जिले में कोरोना की प्रथम डोज 83 प्रतिशत तक लग चुकी है और जल्दी ही हम शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल कर लेंगे. इस टीकाकरण अभियान में जैसलमेर जिले के सरहदी इलाकों तथा दुर्गम मरुस्थलीय क्षेत्रों के अलावा दूर दूर तक फैली हुई ढाणियों में बसी आबादी के लिए विशेष रूप से हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आने वाले करड़ा, पोछीना गांव की ढाणियों आदि में डोर टू डोर जाकर वैक्सीनेशन करने में ए.एन.एम अनीता व रेणू की सराहनीय भूमिका रही है. यहां पर 96 प्रतिशत वैक्सीनेशन का कार्य पूरा हो चुका है."

जल्द शत प्रतिशत टीकारण होगा पूरा
वही दूसरी तरफ जिला कलेक्टर आशीष मोदी जो पूरे इस वैक्सीनेशन कार्यों की समय समय पर मॉनिटरिंग कर रहे हैं ने एक विशेष बातचीत में बताया कि जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में पहले वैक्सीन को लेकर कई भ्रांतियां थीं, लेकिन हमनें स्थानीय लोगों व उनके समाज के धर्मगुरूओं आदि की मदद लेकर उन भ्रांतियों को दूर किया.अब यहां के लोगो में जागरूकता बढ़ी है और वह बिना हिचकिचाहट के टीका लगवा रहे हैं. साथ ही अपने अन्य रिश्तेदारों और पड़ोसियों को टीका लगवाने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं. जल्द ही यहां शत प्रथिशत टीकाकरण पूरा कर लिया जाएगा.

जैसलमेर से विमल भाटिया की रिपोर्ट