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Body Shaming: बॉडी शेमिंग का युवाओं के मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा बुरा असर, AIIMS-ICMR की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Body Shaming Impact: एम्स और आईसीएमआर की एक हालिया स्टडी ने युवाओं में बढ़ती 'बॉडी इमेज एंग्जायटी' को लेकर चिंताजनक खुलासा किया है. इस रिसर्च के अनुसार मोटापे से ग्रस्त युवा, सामान्य वजन वालों की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा बॉडी इमेज एंग्जायटी का सामना करते हैं. बॉडी इमेज एंजाइटी युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है.

Body Shaming Body Shaming

एम्स और आईसीएमआर की एक हालिया स्टडी ने युवाओं में बढ़ती 'बॉडी इमेज एंग्जायटी' को लेकर चिंताजनक खुलासा किया है. रिसर्च में यह सामने आया कि 18 से 30 वर्ष के युवाओं में बॉडी इमेज एंजाइटी तेजी से बढ़ रही है. इस अध्ययन में 1071 युवाओं को शामिल किया गया, जिनमें से 49% मोटापे से ग्रस्त और 47% कम वजन वाले थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि मोटे और दुबले युवाओं में सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में तीन गुना अधिक बॉडी इमेज एंजाइटी होती है. आज के समय में बॉडी शेमिंग और बॉडी इमेज एंजाइटी एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन गई है. 

रिसर्च के प्रमुख डॉ. पीयूष रंजन ने बताया, बॉडी इमेज एंजाइटी न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि यह युवाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन पर भी असर डालती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या केवल मोटे या दुबले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य वजन वाले लोग भी इससे प्रभावित होते हैं.

क्या है बॉडी शेमिंग
क्या आपने कभी सोचा है कि मैं बहुत मोटी या पतली लग रही हूं या फिर दूसरों की नकारात्मक टिप्पणियां जैसे तुम मोटे होते जा रहे हो या तुम्हारा बुढ़ापा आ रहा है, इन सब बातों को सुनकर दुखी हुए हैं. यह सब बॉडी शेमिंग के उदाहरण हैं. यह कमेंट केवल आपके शरीर के आकार के बारे में नहीं होती है. इससे आपके सेल्फ-रिस्पेक्ट पर भी नेगेटिव असर पड़ता है.

सामाजिक दबाव और सोशल मीडिया का प्रभाव
डॉ. रंजन ने बताया कि सोशल मीडिया पर सुंदर दिखने का दबाव युवाओं में मानसिक तनाव को बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया केवल समाज का प्रतिबिंब है. असली समस्या परिवार और समाज में मौजूद विचारधारा है, जो बच्चों को बचपन से ही उनके लुक्स को लेकर जज करती है.

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. निशा खन्ना ने कहा कि बचपन से ही बच्चों पर उनके वजन, रंग और लुक्स को लेकर टिप्पणियां की जाती हैं, जो उनके आत्मसम्मान को प्रभावित करती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि बॉडी शेमिंग के कारण लोग अवसाद और एंजाइटी का शिकार हो जाते हैं.

फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन
योगा और फिटनेस एक्सपर्ट मीनल पाठक ने कहा कि फिटनेस को लेकर जागरूकता अच्छी बात है, लेकिन इसका ओवरडोज मानसिक तनाव का कारण बन सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि योग, प्राणायाम और संतुलित आहार अपनाकर लोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं. लाइफस्टाइल एक्सपर्ट डॉ. कनिका खन्ना ने कहा कि संतुलित आहार और होलिस्टिक अप्रोच अपनाने से बॉडी इमेज एंजाइटी को कम किया जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि हार्मोनल असंतुलन और विटामिन की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकती है.

परिवार और समाज की भूमिका
विशेषज्ञों ने जोर दिया कि परिवार और समाज को बच्चों के आत्मसम्मान को बढ़ाने के लिए सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए. डॉ. रंजन ने कहा कि सुंदरता केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि व्यक्ति की उपयोगिता और स्वास्थ्य पर आधारित होनी चाहिए. डॉ. कनिका ने कहा कि योग, प्राणायाम, संतुलित आहार और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देकर इस समस्या को हल किया जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि समाज में बॉडी शेमिंग के खिलाफ जागरूकता फैलाने की जरूरत है.