Cancer Drug
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कैंसर का इलाज सिर्फ मरीज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण नहीं होता, बल्कि परिवार की जेब पर भी भारी पड़ता है. कई बार दवाओं का खर्च इतना बढ़ जाता है कि परिवार को अपनी बचत तक खर्च करनी पड़ती है. लेकिन अब कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं की कीमतें घटाई गई हैं. दवाओं की नई अधिकतम खुदरा कीमतें (MRP) 9 नवंबर से लागू होंगी. नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के निर्देश के बाद दवा कंपनियों ने कीमतों में कटौती की है. कुछ दवाओं के दाम 57 से 69% तक कम हुए हैं. इससे मरीजों को दवाएं खरीदने में पहले के मुकाबले कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
42 हजार रुपए वाला इंजेक्शन अब 13,136 रुपए में मिलेगा
दवा कंपनी टॉरेंट की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, NPPA के 17 अक्टूबर 2026 के आदेश के बाद दवाओं की कीमतें घटाई गई हैं. इनमें कोलोरेक्टल कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, किडनी कैंसर और अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं. कीमतों में कटौती का असर कुछ महंगी दवाओं पर भी पड़ा है. BevakALP 400 mg इंजेक्शन, जिसकी पुरानी कीमत 42,000 रुपए थी, अब 13,136 रुपए में मिलेगा. यानी इसकी कीमत में करीब 69% की कमी आई है. वहीं, BevakALP 100 mg इंजेक्शन की कीमत 10,500 रुपए से घटकर 4,523 रुपए हो गई है. इसकी कीमत करीब 57% कम हुई है.
इन दवाओं के दाम भी घटे
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दूसरी दवाओं की कीमतों में भी कमी की गई है.
Pemotide 500 mg इंजेक्शन- पहले 6,985 रुपए में मिलता था, अब इसकी कीमत 2,597.65 रुपए होगी.
Erlocip 150 mg टैबलेट- सिप्ला की इस दवा की 30 टैबलेट की कीमत 9,798.99 रुपए से घटाकर 3,448 रुपए कर दी गई है. इसका इस्तेमाल फेफड़ों के कैंसर के इलाज में होता है.
Xbira 250 mg टैबलेट- इसकी 120 टैबलेट की कीमत 22,120 रुपए से घटाकर 11,048 रुपए कर दी गई है. यह दवा प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती है.
इन कीमतों में कमी से उन मरीजों को खास राहत मिल सकती है, जिन्हें लंबे समय तक दवाएं लेनी पड़ती हैं. हालांकि, वास्तविक बचत मरीज की दवा की जरूरत और डॉक्टर के बताए इलाज पर निर्भर करेगी.
अस्पताल में इलाज का पूरा खर्च भी घटेगा?
दवाओं की कीमतें कम होने से मरीजों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन कैंसर के इलाज का कुल खर्च कितना घटेगा, यह भी महत्वपूर्ण है. अस्पताल में भर्ती होने, जांच, इंजेक्शन देने और अन्य चिकित्सा सेवाओं के लिए भी पैसे खर्च करने पड़ते हैं. ऐसे में सिर्फ दवाओं के दाम घटने से पूरे इलाज का खर्च उतना कम नहीं होगा. दवा की कीमत में कमी का लाभ मरीज तक पहुंचना जरूरी है. इसके लिए मरीजों को नई MRP की जांच करनी चाहिए और दवा खरीदते समय बिल जरूर लेना चाहिए.
डॉक्टर ने सरकार के फैसले का स्वागत किया
मेदांता द मेडिसिटी में मेडिकल ऑन्कोलॉजी और हेमेटोलॉजी के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार वैद्य ने इस पहल का स्वागत किया है. उनके मुताबिक, जीवन बचाने वाली दवाओं को सस्ता बनाना स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों की पहुंच में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करने वाला हर कदम महत्वपूर्ण है. व्यावसायिक मुनाफे से ज्यादा जरूरी लोगों की जान बचाना है.
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