scorecardresearch

डायबिटीज से बचने के लिए चावल-रोटी छोड़ना जरूरी नहीं, डॉ. श्रीराम नेने ने बताया कैसी होनी चाहिए आपकी थाली

शरीर जितनी ऊर्जा खर्च करता है, उससे ज्यादा कैलोरी लेने पर वजन और सेहत से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए सिर्फ कार्बोहाइड्रेट को दोष देने के बजाय उसकी मात्रा, गुणवत्ता और शारीरिक गतिविधि पर भी ध्यान देना चाहिए.

Advertisement
Dr Shriram Nene Dr Shriram Nene

भारतीय घरों में चावल, रोटी और दाल के बिना खाने की कल्पना करना मुश्किल है. लेकिन डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच अक्सर सवाल उठता है कि क्या हेल्दी रहने के लिए चावल और रोटी खाना बंद कर देना चाहिए? डॉ. श्रीराम नेने का मानना है कि इसका जवाब पारंपरिक खाना छोड़ने में नहीं, बल्कि उसे सही मात्रा और संतुलन में खाने में है. इंडिया टुडे के हेल्थवेल्थ समिट में '21 डेज टू गुड हेल्थ' सेशन के दौरान उन्होंने बताया कि भारतीय थाली में छोटे बदलाव करके भी हेल्दी रहा जा सकता है.

भारत में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि हमारी थाली में क्या है, कितना है और दिनभर हम कितनी शारीरिक मेहनत करते हैं.

चावल-रोटी नहीं, खाने का तरीका भी समझना जरूरी
डॉ. नेने के मुताबिक, पहले ज्यादातर लोग खेती और दूसरे मेहनत वाले काम करते थे. अब बड़ी संख्या में लोग ऑफिस, आईटी कंपनियों और बीपीओ में बैठकर काम करते हैं. दूसरी तरफ, आसानी से मिलने वाला ज्यादा कैलोरी वाला खाना भी हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. ऐसे में शरीर जितनी ऊर्जा खर्च करता है, उससे ज्यादा कैलोरी लेने पर वजन और सेहत से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

थाली में आधी सब्जियां एक चौथाई प्रोटीन रखें
डॉ. नेने ने संतुलित खाने के लिए थाली का आसान तरीका बताया है. इसके मुताबिक, आधी थाली में रेशेदार सब्जियां, एक चौथाई में प्रोटीन और बाकी एक चौथाई में साबुत अनाज जैसे कम रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ होने चाहिए. रोटी या चावल के साथ पर्याप्त सब्जियां और दाल, पनीर या दूसरे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें. अपनी जरूरत के हिसाब से मात्रा तय करना भी जरूरी है.

वड़ा पाव खाना है तो बनाने का तरीका बदलें
सेहतमंद खाने का मतलब अपने पसंदीदा व्यंजन छोड़ देना नहीं है. डॉ. नेने ने मुंबई के मशहूर वड़ा पाव का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी टीम ने आलू की जगह शकरकंद का इस्तेमाल किया. उन्होंने पाव के लिए बाजरे जैसे मोटे अनाज के विकल्पों और वड़ा बनाने के अलग-अलग तरीकों पर भी एक्सपेरिमेंट किए. शकरकंद में फाइबर होता है और उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स आलू की कुछ किस्मों से कम हो सकता है.

चाय-कॉफी में चीनी धीरे-धीरे कम करें
डॉ. नेने ने रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव करने की सलाह दी. शुरुआत चाय या कॉफी में चीनी कम करने से की जा सकती है. पहले एक हफ्ते बिना चीनी पीने की कोशिश करें और फिर इस आदत को आगे बढ़ाएं. उन्होंने यह भी समझाया कि सिर्फ शुगर-फ्री ड्रिंक चुन लेने से पूरा खाना सेहतमंद नहीं हो जाता. पूरे दिन के खानपान पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. स्वस्थ आदतें बचपन से विकसित करनी चाहिए. बच्चों को हर बार इनाम के तौर पर बिस्किट या मीठी चीजें देने के बजाय फल जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं.

ये भी पढ़ें: