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अक्सर वर्क आउट करने वाले ज्यादातर लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा पसीना निकलेगा, उतनी ही ज्यादा फैट बर्न होगा. यही वजह है कि कई लोग बिना पंखे के वर्कआउट करते हैं या फिर स्लिमिंग बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं. इसके पीछे की वजह होती है ज्यादा पसीना निकालना. लेकिन क्या सच में पसीना और फैट बर्न का सीधा संबंध है?
पसीना हमारे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम है. जब हम दौड़ते हैं, जिम में एक्सरसाइज करते हैं, तो शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. इस तापमान को नॉर्मल रखने के लिए बॉडी स्किन के जरिए पसीना बाहर निकालती है. जब यह पसीना हवा के टच में आकर सूखता है, तो शरीर को ठंडक मिलती है. यानी पसीने का मेन काम शरीर को ठंडा रखना है, फैट को पिघलाना नहीं.
कई बार हेवी वर्कआउट के बाद वेट मशीन पर वजन कम दिखाई देता है. इससे लोगों को लगता है कि उनका फैट कम हो गया है. जबकि ऐसा नहीं होता. असल में पसीने के साथ शरीर से पानी और कुछ जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं. इसी वजह से वजन टेम्पररी रूप से कम दिखता है. जैसे ही आप पानी या कुछ इनटेक लेते है, वजन फिर नॉर्मल हो जाता है.
फैट कम होने का संबंध शरीर के अंदर होने वाली मेटाबॉलिक एक्टिविटीज से जुड़ा होता है. जब शरीर को एनर्जी की जरूरत पड़ती है, तो वह फैट सेल्स को तोड़कर एनर्जी बनाता है. इस दौरान फैट धीरे-धीरे कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में बदलता है. इसलिए फैट बर्न का संबंध आपकी शारीरिक एक्टिविटी और कैलोरी खर्च होने से है, न कि केवल पसीने से.
हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है. किसी को थोड़ा काम करने पर भी ज्यादा पसीना आता है, जबकि कुछ लोगों को हेवी एक्सरसाइज के बाद भी कम पसीना आता है. पसीना आने की क्वांटिटी मौसम, उमस, शरीर की बनावट, स्वेट ग्लैंड्स और जेनेटिक्स पर निर्भर करती है. इसलिए कम पसीना आने का मतलब यह नहीं कि आपकी कैलोरी बर्न नहीं हो रही.
जानबूझकर ज्यादा पसीना निकालने की कोशिश स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है. इससे डिहाइड्रेशन, चक्कर, कमजोरी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा स्लिमिंग बेल्ट या प्लास्टिक रैप का इस्तेमाल भी फैट कम नहीं करता. यह केवल शरीर का तापमान बढ़ाता है और स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है.