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ठेले पर बिक रहे फल दे सकते हैं बीमारी, गर्मी में इन्हें खाने से बचें, जानें जरूरी बातें

गर्मी के मौसम में तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा तक पहुंच जाता है. ऐसी गर्मी में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं.

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सुमन को तेज गर्मी लगी...आसपास देखा तो एक ठेले पर कटा हुआ अनानास और तरबूज मिल रहा था...सुमन ने सोचा गर्मी के मौसम में कुछ स्पाइसी और बाहर के खाने से बेहतर है फ्रूट खा लिया जाए..तेज धूप, चिलचिलाती गर्मी और पसीने से तर-बतर सुमन खुद को संभालते हुए उस ठेले तक पहुंची. फल ताजे और ठंडे नजर आ रहे थे. उसने बिना ज्यादा सोचे एक प्लेट खरीद ली और तुरंत खा भी ली.

खुले में बिकने वाले कटे फल न खाएं
कुछ देर तक तो उसे राहत महसूस हुई, लेकिन शाम होते-होते उसके पेट में हल्का दर्द शुरू हो गया. धीरे-धीरे उसे उल्टी जैसा महसूस होने लगा और शरीर में कमजोरी भी बढ़ने लगी. सुमन की यह स्थिति कोई अलग मामला नहीं है. गर्मियों में ऐसे कई लोग अनजाने में अपनी सेहत के साथ जोखिम उठा लेते हैं. बाहर खुले में बिकने वाले कटे फल और जूस दिखने में भले ही ताजगी भरे लगते हों, लेकिन हकीकत में ये कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकते हैं.

गर्मी में कटे हुए फल ज्यादा खतरनाक क्यों हो जाते हैं?
गर्मी के मौसम में तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा तक पहुंच जाता है. ऐसी गर्मी में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं. जब फल काटकर खुले में रखे जाते हैं, तो उनकी सतह पर नमी और शुगर की मात्रा बैक्टीरिया के लिए परफेक्ट माहौल तैयार करती है.

इसके अलावा, ये फल अक्सर घंटों तक खुले में रखे रहते हैं, जिससे उन पर धूल, मिट्टी और प्रदूषण के कण जम जाते हैं. मक्खियां भी इन पर बैठती हैं, जो अपने साथ कई तरह के कीटाणु लेकर आती हैं. ऐसे में ये फल देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह दूषित हो सकते हैं.

सड़क किनारे मिलने वाले जूस पीने लायक हैं?
हां, कई मामलों में जूस भी उतने ही जोखिम भरे होते हैं. गन्ने का रस, बेल का शरबत या मैंगो शेक अक्सर बिना साफ-सफाई के बनाए जाते हैं. जूस बनाने में इस्तेमाल होने वाला पानी कई बार गंदा होता है और बर्फ भी गंदे पानी से बनाई जा सकती है. जूस मशीन की सफाई भी नियमित रूप से नहीं होती, जिससे उसमें बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं. जब ये सब चीजें मिलती हैं, तो एक गिलास जूस ताजगी देने की बजाय बीमारी दे सकता है.

किन बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?

  • फूड पॉइजनिंग: पेट में दर्द, उल्टी और दस्त की समस्या

  • डायरिया: बार-बार पतले दस्त और कमजोरी

  • टाइफाइड: लंबे समय तक बुखार और कमजोरी

  • डिहाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना और थकान

इन बीमारियों का असर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर ज्यादा गंभीर हो सकता है.

क्या सिर्फ देखने से पता चल सकता है कि फल सुरक्षित है?
अक्सर लोग यही गलती करते हैं. फल अगर ताजा और रंगीन दिख रहा है, तो वे उसे सुरक्षित मान लेते हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि बैक्टीरिया आंखों से दिखाई नहीं देते. कई बार फल ऊपर से बिल्कुल ठीक लगता है, लेकिन उसके अंदर सूक्ष्म जीव पनप चुके होते हैं.

गर्मी में खुद को सुरक्षित कैसे रखें?

  • हमेशा घर का बना ताजा खाना खाएं.

  • फल घर पर धोकर और काटकर ही खाएं.

  • बाहर खुले में बिक रहे कटे फल और जूस से बचें.

  • केवल साफ और फिल्टर किया हुआ पानी पिएं.

  • ज्यादा देर तक बाहर रखे खाने से दूरी बनाएं.

अगर गलती से दूषित खाना खा लिया तो क्या करें?
अगर खाने के बाद आपको पेट दर्द, उल्टी, दस्त या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें. तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. साथ ही, शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए ORS, नारियल पानी या सादा पानी पीते रहें. समय पर इलाज मिलने से स्थिति गंभीर होने से बच सकती है.