
Skin Whitening Treatment: Photo: Getty
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इस दुनिया में हर कोई उम्र की रफ्तार को थामना चाहता है. सेलिब्रिटीज हों या फिर आम लोग, हर कोई चाहता है कि उनका चेहरा गोरा दिखे. इसलिए खूबसूरत और जवान दिखने की रेस में लोग तरह-तरह के ट्रीटमेंट आजमा रहे हैं.
आजकल कई लोग अपनी त्वचा का रंग हल्का या फेयर दिखाने के लिए स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट का सहारा ले हैं. इस ट्रीटमेंट्स की मदद से त्वचा में मौजूद मेलानिन को कम किया जाता है. मेलानिन हमारी स्किन का कलर तय करता है.
स्किन फेयरनेस के लिए कई तरह के विकल्प मौजूद
मार्केट में स्किन फेयरनेस के लिए कई तरह के विकल्प मौजूद हैं, जैसे टॉपिकल क्रीम, केमिकल पील, लेजर थेरेपी और इंजेक्शन. कई प्रोडक्ट्स और प्रोसीजर्स यह दावा करते हैं कि त्वचा को हल्का या गोरा बना सकते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है.
नेचुरल रंग बदलना आसान नहीं: डॉक्टर
स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट को लेकर हमने एलांटिस हेल्थकेयर की डर्मेटोलॉजिस्ट और एस्थेटिक फिजिशियन डॉक्टर चांदनी जैन गुप्ता से बात की. उन्होंने बताया कि स्किन का नेचुरल कलर ज्यादातर जीन्स से निर्धारित होता है. कोई भी ट्रीटमेंट स्थायी रूप से त्वचा का प्राकृतिक रंग नहीं बदल सकता है, ये ट्रीटमेंट केवल स्किन के टोन को थोड़ा बहुत सुधार सकते हैं.
स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट्स भी है?
इस सवाल के जवाब में डॉक्टर चांदनी कहती हैं, स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट का सबसे बड़ा खतरा इसके साइड इफेक्ट्स हैं. आमतौर पर लोगों में इस ट्रीटमेंट को लेने के बाद रेडनेस, जलन, त्वचा का सूखापन और सनलाइट के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना देखा जाता है. अगर लंबे समय तक स्ट्रॉन्ग केमिकल वाले क्रीम, जैसे स्टेरॉयड, मरकरी या हाई डोज हाइड्रोकिनोन का इस्तेमाल किया जाए, तो यह स्किन को पतला कर सकता है, पिगमेंटेशन और मुंहासे भी बढ़ा सकता है. गंभीर मामलों में यह स्किन डैमेज भी कर सकता है.

लेजर थेरेपी में भी खतरा कम नहीं है. अगर यह प्रक्रिया योग्य और प्रशिक्षित डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा सही ढंग से नहीं की जाए, तो त्वचा जल सकती है. स्कार बन सकते हैं या हाइपरपिगमेंटेशन की समस्या आ सकती है. कई लोग बिना परामर्श के खुद से या लोकल सेंटर्स में ये ट्रीटमेंट ले लेते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है.
स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट में खर्च कितना आता है?
स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट का खर्च भी अलग-अलग होता है. ओवर-द-काउंटर क्रीम और सीरम सस्ते से लेकर महंगे तक मिलते हैं. ये सबकुछ ब्रांड और क्वालिटी पर निर्भर करता है. केमिकल पील या लेजर थेरेपी महंगी होती है. एक सिटिंग का खर्च लाखों तक हो सकता है और अक्सर कई सेशन की जरूरत पड़ती है.
डॉक्टर के अनुसार, कभी भी किसी भी ट्रीटमेंट को शुरू करने से पहले अच्छे डॉक्टर से परामर्श लें. त्वचा की सुरक्षा को प्राथमिकता दें. स्किन हेल्थ को फेयरनेस पर प्राथमिकता देना ज्यादा जरूरी है. सूरज की किरणों से बचाव, हाइड्रेशन और संतुलित आहार से भी त्वचा की रंगत और हेल्थ में सुधार आता है.

ग्लूटाथिओन इंजेक्शन कितना मददगार है?
ग्लूटाथियोन एक प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट है, जो हमारे शरीर की हर कोशिका में पाया जाता है. इसका काम हमारे शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाना और सेल्स को नुकसान से बचाना है. यही वजह है कि आजकल बहुत से लोग ग्लूटाथियोन के इंजेक्शन या टैबलेट लेने लगे हैं.
अगर आप सिर्फ एक सेशन लें तो इसका खर्च लगभग 8,000 रुपये होता है. वहीं, अगर आप 10 इंजेक्शन का पैकेज लेना चाहें तो इसकी कीमत 60,000 रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है.
स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट कोई जादू की छड़ी नहीं है. यह कुछ हद तक त्वचा के टोन को सुधार सकता है, लेकिन नेचुरल कलर को नहीं बदल सकता. इसके साइड इफेक्ट्स गंभीर हो सकते हैं और खर्च भी कम नहीं आता.