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मछली खाते समय गले में फंस जाता है कांटा? तो बना लें ये वाली Fish, पोषण मिलेगा भरपूर

Fish Without kanta: Aquaculture नाम की मेडिकल जर्नल में छपे एक रिव्यू में बताया गया है कि, RunX2b नाम के जीन को एडिट करके, किबेल केंडाई मछली में बिना कांटे वाली (सिर्फ हड्डी वाली) मछली तैयार की गई है. इन नई किस्म की मछलियों को Zhongke No. 6 नाम दिया गया है. इसलिए कांटे न होने का जिम्मेदार खास जीन (runx2b gene) को सही तरीके से पहचानकर बदलने में काफी समय लगा है. इसी वजह से ये रिसर्च 6 साल तक चली है.

fish without kanta fish without kanta

मछली खाने वालों की सबसे बड़ी दिक्कत है उसका कांटा है. जिसके चलते कई बार लोग इसे खाने से बचते हैं, क्योंकि मछली में छोटे-छोटे इतने कांटे होते हैं कि ये गले में जाकर फंस जाते हैं. मछलियों में प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, विटामिन्स और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए. लेकिन अगर आप कांटे की वजह से मछली खाने से परहेज करते हैं, तो कई ऐसी मछलियां हैं, जिनमें कांटे बिल्कुल नहीं होते. जी हां चीन ने एक ऐसी मछली डेवलप की है, जिसमें कांटे बिल्कुल नहीं होंगे. चलिए आपको बताते हैं इस मछली के बारे में.

मछली में फैट नहीं होता. इसमें प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन और दूसरे पोषक तत्व भरपूर होते हैं. ये पोषक तत्व बच्चों की सेहत और विकास के लिए बड़ों से भी ज्यादा जरूरी हैं. इन बातों को ध्यान में रखते हुए, चीन में बिना कांटे वाली एक मछली बनाई गई है.

रिसर्च में लगे 6 साल
Aquaculture नाम की मेडिकल जर्नल में छपे एक रिव्यू में बताया गया है कि, RunX2b नाम के जीन को एडिट करके, किबेल केंडाई मछली में बिना कांटे वाली (सिर्फ हड्डी वाली) मछली तैयार की गई है. इन नई किस्म की मछलियों को Zhongke No. 6 नाम दिया गया है. इसलिए कांटे न होने का जिम्मेदार खास जीन (runx2b gene) को सही तरीके से पहचानकर बदलने में काफी समय लगा है. इसी वजह से ये रिसर्च 6 साल तक चली है.

नहीं है एक भी कांटा
खास बात है कि इसका स्वाद, खुशबू और पोषक तत्व बिल्कुल आम मछलियों जैसे ही हैं. आम मछलियों के मुकाबले केंडई मछलियों में कई लेयर वाले क्रोमोसोम्स होते हैं. रिसर्च में कहा गया है कि, जहां आमतौर पर एक केंटई मछली में करीब 80 से ज्यादा छोटे कांटे (इंट्रामस्क्युलर बोन्स) होते हैं, लेकिन इस नई किस्म में सिर्फ बड़ी हड्डी ही होती है. जेनेटिकली मॉडिफाइड होने की वजह से मछली के शरीर में छोटे कांटे पूरी तरह गायब हो जाते हैं. फिर भी, मछली की बाकी जरूरी हड्डियों पर कोई असर नहीं पड़ता.

25% ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं ये मछलियां
ये मछलियां 25% ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, इसलिए कम समय में ज्यादा फायदा मिल सकता है. इसके अलावा, आम मछलियों के मुकाबले इन मछलियों को कम चारा देना पड़ता है, जिससे किसानों का खर्च भी कम होता है. गहरे तालाबों में भी ये मछलियां बीमारियों का सामना करके अच्छी तरह बढ़ती हैं, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.

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