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Fridge vs Matka: गर्मी में ठंडा पानी पीने का सही तरीका क्या है? जानिए फ्रिज का चिल्ड पानी बेहतर या मटके का नेचुरल कूलिंग

फ्रिज का बहुत ज्यादा चिल्ड पानी कुछ लोगों में गले की समस्या, पाचन में गड़बड़ी या सेंसिटिव दांतों की परेशानी बढ़ा सकता है. हालांकि साफ-सफाई का ध्यान रखना दोनों ही मामलों में जरूरी है.

Fridge vs Matka Water Fridge vs Matka Water
हाइलाइट्स
  • गर्मी में ठंडा पानी पीने का सही तरीका क्या है?

  • फ्रिज का पानी या मटके का पानी, कौन ज्यादा बेहतर?

गर्मी में प्यास लगते ही लोग फ्रिज खोलकर ठंडा पानी ढूंढते हैं. तेज धूप से घर लौटते ही एक सांस में चिल्ड पानी पी लेना हम में से ज्यादातर लोगों की आदत है. लेकिन क्या शरीर को तुरंत इतना ठंडा पानी देना सही है? क्या मटके का पानी आज भी सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है? गर्मी में सिर्फ ठंडा पानी पीना ही जरूरी नहीं, बल्कि सही तापमान का पानी पीना ज्यादा अहम है. गलत तरीके से पानी पीने पर गला खराब होने से लेकर पाचन और इम्युनिटी तक प्रभावित हो सकती है.

धूप से आते ही तुरंत ठंडा पानी पीना कितना सही?
कई लोग बाहर की गर्मी से आते ही फ्रिज का बेहद ठंडा पानी पी लेते हैं. ऐसा करने से शरीर के तापमान में अचानक बदलाव आता है, जिससे गले में खराश, सिरदर्द या पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है. शरीर जब बहुत गर्म होता है, तब उसे अचानक ज्यादा ठंडा पानी देने से ब्लड सर्कुलेशन पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए धूप से आने के बाद 5 से 10 मिनट रुककर सामान्य या हल्का ठंडा पानी पीना बेहतर माना जाता है.

फ्रिज का पानी या मटके का पानी, कौन ज्यादा बेहतर?
फ्रिज का पानी काफी ज्यादा ठंडा होता है, जबकि मटके का पानी नेचुरल तरीके से ठंडा रहता है. यही वजह है कि आयुर्वेद और कई हेल्थ एक्सपर्ट्स मटके के पानी को ज्यादा बैलेंस्ड मानते हैं. मटके की मिट्टी पानी को धीरे-धीरे ठंडा करती है, जिससे उसका तापमान शरीर के लिए ज्यादा आरामदायक रहता है.

वहीं फ्रिज का बहुत ज्यादा चिल्ड पानी कुछ लोगों में गले की समस्या, पाचन में गड़बड़ी या सेंसिटिव दांतों की परेशानी बढ़ा सकता है. हालांकि साफ-सफाई का ध्यान रखना दोनों ही मामलों में जरूरी है.

क्या बार-बार चिल्ड पानी पीने से गला और इम्युनिटी प्रभावित होती है?
बहुत ज्यादा ठंडा पानी लगातार पीने से गले की नसों पर असर पड़ सकता है. इससे कई लोगों को गले में खराश, कफ या सर्दी जैसी परेशानी महसूस होती है. खासतौर पर जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है या जिन्हें बार-बार थ्रोट इन्फेक्शन होता है, उन्हें बर्फ जैसा ठंडा पानी कम पीने की सलाह दी जाती है.

हालांकि सिर्फ ठंडा पानी पीने से सीधे इम्युनिटी खराब हो जाती है, ऐसा कहना पूरी तरह सही नहीं होगा. लेकिन जरूरत से ज्यादा चिल्ड ड्रिंक्स और आइस कोल्ड पानी शरीर को असहज जरूर बना सकते हैं.

मटके का पानी पीने के फायदे क्या हैं?
मटके का पानी सिर्फ ठंडक ही नहीं देता, बल्कि उसका स्वाद भी अलग और प्राकृतिक होता है. माना जाता है कि मिट्टी के बर्तन में रखा पानी हल्का अल्कलाइन नेचर का हो जाता है, जो एसिडिटी कम करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा मटके का पानी बहुत ज्यादा ठंडा नहीं होता, इसलिए यह गले और पाचन पर भी अपेक्षाकृत हल्का माना जाता है.

गांवों और छोटे शहरों में आज भी गर्मियों में मटके का इस्तेमाल इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि यह बिजली के बिना पानी को लंबे समय तक ठंडा बनाए रखता है.

गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखने का सही तरीका क्या है?
सिर्फ ठंडा पानी पीना ही हाइड्रेशन नहीं है. गर्मियों में शरीर को बार-बार थोड़ी मात्रा में पानी देना ज्यादा जरूरी होता है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दिनभर में पर्याप्त पानी के साथ नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और मौसमी फलों का सेवन भी करना चाहिए. बहुत ज्यादा प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी पीना बेहतर होता है. साथ ही प्लास्टिक की बोतलों में लंबे समय तक रखा गर्म पानी पीने से बचना चाहिए.

आखिर सही तरीका क्या है?
अगर आप गर्मियों में स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो बेहद बर्फ जैसा ठंडा पानी पीने के बजाय सामान्य या मटके के हल्के ठंडे पानी को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है. खासतौर पर धूप से आने के तुरंत बाद धीरे-धीरे पानी पीना शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. यानी गर्मी में राहत पाने के लिए सिर्फ ठंडक नहीं, सही आदतें भी जरूरी हैं.